हरियाणा: पिता की कुर्सी पर घर में ही लड़ाई, सरपंची के लिए चुनावी रण में उतरे तीन सगे भाई

झज्जर | हरियाणा में शहरी निकाय चुनावों के साथ प्रदेश की कुछ पंचायतों में पंच- सरपंचों के उपचुनाव भी होने हैं. इसी कड़ी में झज्जर जिले के बादसा गांव में सरपंच पद हेतु हो रहा उपचुनाव पूरे हरियाणा में सुर्खियों में छाया हुआ है. यहां सरपंच की कुर्सी इस बार चुनाव नहीं बल्कि एक ही परिवार के भीतर की सीधी टक्कर बन गई है.

Chunav

तीनों सगे भाई लड़ेंगे सरपंच का चुनाव

गांव बादसा में सरपंच ज्ञानचंद के निधन से खाली हुई सीट पर हो रहे उपचुनाव में उनके तीनों बेटे 45 वर्षीय दीपक, 43 वर्षीय रमेश और 40 वर्षीय मनोज ने चुनावी रण में ताल ठोक दी है. पिता की विरासत संभालने की होड़ अब भाइयों के बीच मुकाबले में बदल चुकी है. ऐसे में गांव की सियासत गर्मा गई है. तीनों सगे भाईयों के सरपंच पद हेतु चुनाव लड़ने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है. अब गांव में चर्चा है कि पिता ज्ञानचंद के लिए तीनों बेटों ने वोट मांगे, अब तीनों अपने- अपने लिए वोटों की अपील करने ग्रामीणों के बीच जा रहे हैं.

मूलभूत सुविधाएं रहेगी प्राथमिकता

स्वर्गीय सरपंच ज्ञानचंद के सबसे बड़े बेटे दीपक ने बताया कि उन्होंने पिता के सरपंच रहते हमेशा उनका सहयोग किया. मैं सरपंच के सभी कामकाज जानता हूं. पिता के अधूरे कार्यों को पूरा करने के उद्देश्य से सरपंच पद का चुनाव लड़ने का मन बनाया है. गांव में बिजली-पानी, पक्की गलियां, सीवरेज व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगी.

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पिता के सपने पूरा करना उद्देश्य

ज्ञानचंद के दूसरे बेटे रमेश ने बताया कि पिताजी के सरपंच रहते उन्होंने ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को नजदीक से देखा हैं. पिता जी के मार्गदर्शन में ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. गुरुग्राम से वकालत कर रहे रमेश ने बताया कि एक शिक्षित व्यक्ति ही गांव में विकास करवा सकता है इसलिए उन्होंने चुनावी रण में उतरने का फैसला लिया है ताकि सरपंच बनकर पिता के अधूरे पड़े कामों को पूरा करवाकर ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ दिया जा सके.

परिवार के फैसले का करेंगे आदर

सबसे छोटे बेटे मनोज ने कहा कि पिताजी का उनके साथ विशेष लगाव था. वे सरपंच के कामकाज में भी पिताजी का सहयोग करते थे. परिवार के कुछ अन्य लोगों ने भी उन्हें समर्थन दिया है. तीनों भाइयों के चुनाव लड़ने के सवाल पर मनोज ने कहा कि परिवार और बड़े बुजुर्ग परिवार को एक साथ जोडने की कोशिश कर रहे हैं और जो भी फैसला होगा, उसका आदर करेंगे.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.