चंडीगढ़ | हरियाणा में जो प्रोजेक्ट्स रास्ता नहीं मिलने के चलते अधर में लटक रहें हैं, वो अब रफ्तार भरेंगे. सूबे की नायब सैनी सरकार ने गांवों की शामलात भूमि (साझा पंचायत जमीन) से निजी प्रोजेक्ट्स को रास्ता देने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने बुधवार को ‘हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संशोधन नियम, 2026’ लागू कर दिए.

नए नियमों के तहत अब ऐसे प्रोजेक्ट्स, जिनके पास आने-जाने का पर्याप्त रास्ता नहीं है, उन्हें पंचायत की जमीन से नया रास्ता दिया जा सकेगा.
उद्योग क्षेत्र को मिलेगा फायदा
प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, यह सुविधा उन प्रोजेक्ट्स को मिलेगी, जिन्हें चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) या किसी अन्य सरकारी लाइसेंस की जरूरत है और वहां पहुंच मार्ग नहीं होने या अपर्याप्त होने के कारण परियोजना अटक रही है.
नियमों में स्पष्ट किया गया है कि पंचायत की शामलात भूमि से रास्ता तभी दिया जाएगा, जब संबंधित ग्राम पंचायत तीन-चौथाई बहुमत और ग्राम सभा दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करेगी. इसके बाद राज्य सरकार नया रास्ता चिह्नित कर सकेगी. सरकार के इस फैसले से औद्योगिक, आवासीय और अन्य निजी परियोजनाओं को राहत मिलेगी. कई बार सीएलयू मिलने के बावजूद रास्ता नहीं होने के कारण प्रोजेक्ट अटक जाते थे. अब पंचायत की मंजूरी के बाद ऐसे प्रोजेक्ट्स को कानूनी तौर पर पहुंच मार्ग मिल सकेगा.
पंचायत की ही रहेगी जमीन
सरकार ने यह भी साफ किया कि नया रास्ता पंचायत के स्वामित्व में ही रहेगा और उसका उपयोग सामुदायिक तौर पर किया जाएगा, यानि रास्ता बनने के बाद भी जमीन निजी कंपनी या प्रोजेक्ट मालिक के नाम नहीं होगी. आवाजाही के लिए सभी लोग रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे. प्रोजेक्ट मालिक किसी को नहीं रोक सकेगा.
नए नियमानुसार, प्रोजेक्ट संचालक को बदले में पंचायत को जमीन देनी होगी. यह जमीन प्रोजेक्ट क्षेत्र के 5% हिस्से या रास्ते के लिए दी गई जमीन के चार गुना क्षेत्रफल के बराबर होगी. इनमें जो भी अधिक होगा वही मान्य किया जाएगा. यह जमीन पूरी तरह विकसित रूप में देनी होगी और वहां तक सड़क, बिजली, पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं की पहुंच भी सुनिश्चित करनी होगी.