नई दिल्ली | विदेश जाने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. बता दें कि केंद्र सरकार ने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया को पहले से तेज और आसान कर दिया है. अब अगर आवेदक अपने दस्तावेज सीधे डिजिलॉकर के माध्यम से पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर अपलोड करते हैं, तो पासपोर्ट पहले की तुलना में 8 से 10 दिन जल्दी बन जाता है. पहले जहां पासपोर्ट बनने में 20 से 25 दिन का समय लगता है, वहीं, डिजिलॉकर के जरिए दस्तावेज अपलोड करने पर यह समय घटकर करीब 14 से 15 दिन रह सकता है.

डिजिलॉकर से आवेदन तेज
पासपोर्ट विभाग के अधिकारियों के अनुसार डिजिलॉकर से जुड़े दस्तावेज पहले से सरकारी डेटाबेस से सत्यापित होते है. ऐसे में विभाग को दस्तावेजों की दोबारा जांच करने में कम समय लगता है. इससे आवेदन प्रक्रिया तेजी से पूरी हो पाती है. विभाग के अनुसार, बड़ी संख्या में आवेदन केवल दस्तावेजों में गलतियों के कारण अटक जाते है. कई आवेदक अलग- अलग दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि या पते की अलग जानकारी जमा कर देते है. इसके अलावा धुंधली स्कैन कॉपी, अधूरे दस्तावेज, गलत प्रमाण- पत्र जैसी समस्याएं भी आती रहती है.
डिजिलॉकर से सीधे दस्तावेज लेने पर ऐसी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती है. पासपोर्ट प्रक्रिया में सबसे ज्यादा समय खासतौर पर पुलिस वेरिफिकेशन में लगता है. अधिकारियों का कहना है कि जब आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज डिजिलॉकर से लिंक होकर आते है, तो वे पहले से सत्यापित माने जाते है. इससे पुलिस जांच की प्रक्रिया तेज होगी.
ऐसे करें डिजिलॉकर लिंक
पासपोर्ट आवेदन भरते समय आवेदक अपने डिजिलॉकर अकाउंट को पासपोर्ट सेवा पोर्टल से लिंक कर सकते है. इसके बाद उपलब्ध दस्तावेज स्वतः पोर्टल पर दिखाई देने लगते है. इससे अलग से स्कैन कॉपी अपलोड करने या फोटोकॉपी ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. विभाग आने वाले समय में अधिकतर सेवाओं को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
डिजिलॉकर से आवेदन के फायदे
- दस्तावेज सीधे सरकारी रिकॉर्ड से सत्यापित
- स्कैन कॉपी अपलोड करने की जरूरत कम
- आवेदन में आपत्ति की संभावना कम
- पुलिस वेरिफिकेशन होगी तेज
- फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने में मदद
- पेपरलेस प्रक्रिया को बढ़ावा