चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2000 एकड़ के क्लस्टर में आधुनिक तकनीक के साथ स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना के तहत प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी. इस योजना से जुड़े किसानों को यदि किसी प्रकार का नुकसान होता है तो सरकार उनकी भरपाई भी करेगी. CM रविवार शाम कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में आयोजित प्राकृतिक खेती एवं क्लस्टर गठन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे. कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद रहे.

नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की पुरानी परंपरा का हिस्सा है. सदियों तक इसी खेती पद्धति ने देश की जमीन को उपजाऊ बनाए रखा. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन जीवन का आधार हैं और इनका संरक्षण करना समय की जरूरत है.
2022 में प्राकृतिक खेती योजना शुरू
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 2022 में प्राकृतिक खेती योजना शुरू की थी. इसके लिए एक अलग पोर्टल भी बनाया गया है, जिस पर अब तक करीब 2 लाख किसान पंजीकरण करा चुके हैं. किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए गुरुकुल कुरुक्षेत्र, हमेटी जींद, मंगियाना सिरसा और घरौंडा करनाल में चार प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं. गुरुकुल कुरुक्षेत्र में राज्य सलाहकार की नियुक्ति भी की गई है. यहां अब तक 12,188 किसान, महिलाएं और सरकारी कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं. उन्होंने यह भी घोषणा की कि कृषि विभाग की लगभग 800 एकड़ सरकारी भूमि केवल उन किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 वर्षों तक प्राकृतिक या जैविक खेती करने का संकल्प लेंगे. इसके लिए सरकार नई नीति भी तैयार करेगी. साथ ही पंचकूला जिले के मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक और जैविक खेती के मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा.
सेहत पर प्रतिकूल असर
कार्यक्रम में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र की 180 एकड़ भूमि पर पूरी तरह प्राकृतिक खेती की जा रही है, जहां रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता. वहीं कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राकृतिक खेती का विस्तार बेहद जरूरी है, क्योंकि रासायनिक खेती से जमीन, अनाज और लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.