पंचकुला | हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने RTI से जुड़ी शिकायतों के जल्द निपटारे और अधिकारियों को प्रक्रिया की बेहतर समझ देने की तैयारी शुरू कर दी है. मुख्य सूचना आयुक्त टीवी एसएन प्रसाद ने पंचकुला स्थित कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि अगले महीने करीब 25 हजार स्टेट पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर्स (SPIO) को प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस प्रशिक्षण में सरपंचों को भी शामिल किया जाएगा.

प्रशिक्षण आयोग के सभागार के अलावा प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित होगा. अधिकारियों को आरटीआई प्रक्रिया और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी देने के साथ प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों से फीडबैक भी लिया जाएगा.
मिलेगा बढ़ावा
आयोग अब सुनवाई की प्रक्रिया को ज्यादा आसान बनाने के लिए हाइब्रिड व्यवस्था का विस्तार करेगा. करीब 100 मामलों में हाइब्रिड सुनवाई की जाएगी. वहीं मुख्य सूचना आयुक्त की अदालत में सुनवाई पूरी तरह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की व्यवस्था की जाएगी. इस व्यवस्था से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, खासकर महिलाएं, घर से ही सुनवाई में शामिल हो सकेंगी. हालांकि, जो पक्षकार आयोग में पहुंचकर पेश होना चाहते हैं, उनके लिए यह विकल्प भी खुला रहेगा.
सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, ताकि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण मामलों को आगे की तारीख पर टालने की स्थिति न बने. जरूरत के अनुसार सुनवाई का समय बदला भी जा सकेगा.
ई- फाइल भी होंगे डिजिटल
आयोग ई- फाइल के साथ मूल आवेदन को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है. पहली बार सभी कमिश्नरों के लिए एक केंद्रीय प्रणाली विकसित की जा रही है. इससे अलग- अलग मामलों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को एकीकृत किया जा सकेगा. सुनवाई के दौरान आयुक्त जिस दस्तावेज या आदेश को देख रहे होंगे, उसे याचिकाकर्ता भी देख सकेगा. इससे सुनवाई की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है. जरूरी मामलों में तत्काल सुनवाई की व्यवस्था भी की जाएगी. प्रत्येक आयुक्त के पास 5 समय स्लॉट ऐसे मामलों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे, जिनमें सामान्य प्रक्रिया के तहत सुनवाई की तारीख काफी दूर मिल रही है.
आगे चलकर पक्षकार खुद उपलब्ध स्लॉट के अनुसार अपनी सुनवाई की तारीख बुक कर सकेंगे. इससे मामलों की सुनवाई में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिलेगी.
VC से अधिकारी भी कर सकेंगे पेशी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा से डीएसपी, एसपी और सिविल सर्जन स्तर के अधिकारी भी खुद सुनवाई में शामिल हो सकेंगे. सुनवाई से तीन दिन पहले दोनों पक्षों को फोन कर उनकी उपलब्धता की जानकारी ली जाएगी. सुनवाई वाले दिन भी संपर्क कर उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा जाएगा. अगर किसी पक्ष के पास स्मार्टफोन नहीं है तो टेलीफोन के जरिए उसकी बात रिकॉर्ड कर दूसरे पक्ष को सुनाई जाएगी. आयोग का लक्ष्य लंबित मामलों को तेजी से निपटाना है और पिछले महीने दर्ज मामलों को अगले महीने तक निपटाने की दिशा में काम किया जा रहा है.