ज्योतिष डेस्क | सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोजाना तुलसी की पूजा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है. भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण के भोग में भी तुलसी के पत्ते जरूर शामिल किए जाते हैं. इतना ही नहीं, सूतक और ग्रहण काल के दौरान भी भोजन में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा है. आखिर भोग में तुलसी का पत्ता क्यों चढ़ाया जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? आइए जानते हैं यहां विस्तार से…

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी बेहद प्रिय है. माना जाता है कि भोग में तुलसी दल शामिल करने से भोजन की अशुद्धियां दूर हो जाती हैं और भगवान इसे स्वीकार करते हैं. यही वजह है कि विष्णु जी और श्रीकृष्ण के भोग में तुलसी के पत्ते चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.
भोग लगाना जरूरी
भगवान को भोग लगाते समय उसमें तुलसी का पत्ता जरूर होना चाहिए. तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप भी माना जाता है, इसलिए भोग में तुलसी दल अर्पित करने का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना मां लक्ष्मी की कृपा से भी जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि तुलसी के पत्ते के साथ अर्पित किया गया भोग भगवान को अधिक प्रिय होता है. इसी वजह से विष्णु पूजा और उनके भोग में तुलसी का विशेष स्थान है.
ग्रहण के दौरान भोजन में क्यों डालते हैं तुलसी?
सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन को सुरक्षित रखने के लिए उसमें तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. ऐसे में तुलसी के पत्ते भोजन को अशुद्धि और नकारात्मक प्रभाव से बचाने में सहायक माने जाते हैं. हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है. इसे वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
करें ये उपाय
धन और सुख- समृद्धि की कामना के लिए रोजाना स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद, तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख- समृद्धि बनी रहती है. इसके अलावा, तुलसी के सूखे पत्तों को गंगाजल में मिलाकर घर में छिड़काव करने की भी परंपरा है. माना जाता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण में सकारात्मकता बनी रहती है.
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