नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में यमुना के दूषित होने का सबसे बड़ा कारण नदी में गिरने वाले नाले हैं. इनसे लगातार गंदा पानी यमुना में पहुंच रहा है, जिसके कारण राजधानी में करीब 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि नदी को साफ करने के लिए बड़े सीवेज उपचार संयंत्र (STP) के साथ मोहल्ला स्तर पर विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र (DSTP) विकसित किए जाने चाहिए. मंडपम में आयोजित नदी पुनर्जीवन सम्मेलन में दिल्ली सरकार के मुख्य प्रवक्ता अभय वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.

उन्होंने यमुना की सफाई को लेकर सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलनों से मिलने वाले सुझाव नदी की सफाई की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
तय मानकों का पालन
इंडिया वाटर क्वालिटी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि यमुना की सफाई के लिए नदी में गिरने वाले नालों, एसटीपी और नदी के जल की गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों का सही होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि पानी के नमूने एकत्र करने और उन्हें लैब तक पहुंचाने के दौरान तय मानकों का पालन होना चाहिए. साथ ही, लैब में आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती जरूरी है. सही आंकड़े उपलब्ध होने पर प्रदूषण की वास्तविक स्थिति समझकर प्रभावी समाधान तैयार किया जा सकता है.
वहीं हो उपचार
यमुना बचाओ अभियान के संयोजक डा. शिव सिंह रावत ने कहा कि जिस स्थान पर सीवेज उत्पन्न होता है, वहीं उसका उपचार किया जाना चाहिए. इसके लिए मोहल्ला स्तर पर DSTP विकसित करना प्रभावी विकल्प हो सकता है. उन्होंने कहा कि STP और DSTP से उपचारित पानी का गैर पेयजल कार्यों में इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए. इससे नदी से पानी लेने का दबाव कम होगा.
गंदगी से बचाना जरूरी
अर्थ वारियर्स के पंकज कुमार ने कहा कि नदी में खुद को साफ करने की प्राकृतिक क्षमता होती है. जरूरत इस बात की है कि उसमें गिरने वाली गंदगी को रोका जाए. इंटरनेट आफ थिंग्स (IoT) विशेषज्ञ डा. शाह साउद ने नदी से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण में AI के इस्तेमाल पर जोर दिया. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग हरियाणा के चीफ केमिस्ट अमित सिंह, सत्यम कौल, कृति हेगड़े समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी यमुना की सफाई और नदी पुनर्जीवन को लेकर सुझाव दिए. सम्मेलन में मिले सुझावों की लिखित जानकारी दिल्ली सरकार को दी जाएगी.