नई दिल्ली | सफेद रंग की चमचमाती Toyota Fortuner से उतरकर एक शख्स जब हाथ में झाड़ू लेकर सफाई करने लगा, तो आसपास मौजूद लोगों का ध्यान उसकी तरफ चला गया. पहली नजर में किसी को अंदाजा नहीं था कि लग्जरी कार से पहुंचा यह व्यक्ति नगर परिषद में सफाई कर्मचारी है. कर्नाटक के बंटवाल की यह कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. बीसी रोड पर Fortuner से पहुंचने वाले सेसप्पा की जिंदगी आज भले ही बदली हुई नजर आती हो, लेकिन उनका बचपन और शुरुआती जीवन बेहद मुश्किलों में गुजरा.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1996 में उन्होंने बंटवाल नगर परिषद में काम शुरू किया था. उस समय उन्हें रोज सिर्फ 50 रुपए की दिहाड़ी मिलती थी. पढ़ाई भी तीसरी कक्षा तक ही हो सकी.
नहीं थे पैसे
सेसप्पा के परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कई बार घर में खाने तक की परेशानी रहती थी. सबसे कठिन दौर तब आया जब उनके पिता का निधन हुआ. परिवार के पास अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं थे. मजबूरी में सेसप्पा को पिता के शव को नेत्रावती नदी के किनारे ले जाकर खुद विसर्जित करना पड़ा. इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया. उन्होंने तय किया कि परिवार को गरीबी और मजबूरी से बाहर निकालने के लिए वह हर संभव मेहनत करेंगे.
రోజూ ఫార్చునర్ కారులో పనికి వస్తున్న పారిశుద్ధ్య కార్మికుడు
కర్ణాటకలోని బంట్వాళలో రోజూ ఫార్చునర్ కారులో పనికి వస్తున్న పారిశుద్ధ్య కార్మికుడు శేషప్పణ్ణ
1996 నుంచి శానిటేషన్ వర్కర్గా పనిచేస్తున్న శేషప్పణ్ణ
కార్లంటే ఇష్టం ఉండడంతో లోన్పై తొలుత ఆల్టో, స్కార్పియో, తర్వాత… pic.twitter.com/sp2dPCRnBS
— Telugu Scribe (@TeluguScribe) August 24, 2026
मुश्किल दौर में सेसप्पा शराब की लत के भी शिकार हो गए थे. वर्ष 2005 में बंटवाल के तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर के.यू. बेलियप्पा ने उन्हें शराब छोड़ने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने नशा छोड़कर पूरी तरह मेहनत पर ध्यान देना शुरू कर दिया.
जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
नगर परिषद की नौकरी के साथ उन्होंने खेती, दूध बेचने और पंचायत में पानी सप्लाई जैसे काम भी किए. छोटी बचत और लोन के सहारे उन्होंने पहले Maruti 800, फिर Scorpio खरीदी और आखिरकार सेकंड हैंड Fortuner लेने का सपना भी पूरा कर लिया. आज सेसप्पा अपनी Fortuner से ड्यूटी पर पहुंचते हैं, लेकिन कार की चमक उनके काम के प्रति नजरिया नहीं बदल पाई है. नगर परिषद पहुंचने के बाद वे सामान्य सफाई कर्मचारी की तरह झाड़ू उठाते हैं और अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हैं.
