डीजल की कीमतों में आ सकता है जबरदस्त उछाल, ये बनेगा महंगाई का कारण

नई दिल्ली | पूरे देश में डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं. आने वाले दिनों में पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी बजने वाली है. ऐसा इसलिए क्योंकि कच्चे तेल की किल्लत बढ़ने रोजाना हो रही है. कच्चे तेल समेत कई जरूरी कमोडिटी की कीमतों में कमी से जो राहत मिल रही है, वह कहीं गायब हो सकती है. आम जीवन और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे जरूरी ईंधन डीजल की किल्लत बढ़ने वाली है. अगले कुछ महीनों में दुनिया का हर हिस्सा इससे प्रभावित होगा.

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अमेरिकी डीजल स्टॉक करीब 40 साल के निचले स्तर पर

डीजल की किल्लत के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. अमेरिका में डीजल का स्टॉक 40 साल के निचले स्तर पर आ गया है. यूरोप में भी कमोबेश यही स्थिति है. मार्च तक हालात और बदतर हो जाएंगे क्योंकि तब मुद्र के रास्ते रूस से डीजल आयात पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा. हालात तो अभी से बिगड़ने लगे हैं.

डीजल का वैश्विक (निर्यात) निर्यात घटने लगा है, जिसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान जैसे गरीब देशों पर पड़ेगा. दरअसल, डीजल से न केवल बसें, ट्रक, जहाज और ट्रेनें चलती हैं बल्कि निर्माण और कृषि में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और कारखाने भी चलते हैं. यही वजह है कि डीजल की किल्लत के चलते इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का गहरा असर दिखेगा.

अमेरिका को 8.17 लाख करोड़ का झटका

राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के एनर्जी फेलो मार्क फिनाले के मुताबिक, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से अकेले अमेरिका को करीब 100 अरब डॉलर (8.17 लाख करोड़ रुपये) का झटका लगेगा. फिनले ने कहा, ‘हमारे देश में हर चीज डीजल के दम पर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचती है. सार्वजनिक परिवहन प्रणाली भी एक हद तक डीजल पर निर्भर है. ऐसे में इसकी कमी गंभीर असर दिखाएगी.

अमेरिका में डीजल 50% महंगा

अमेरिका में डीजल लगातार महंगा होता जा रहा है. बेंचमार्क न्यूयॉर्क हार्बर की कीमतें इस साल अब तक लगभग 50% बढ़ी हैं. नवंबर की शुरुआत में यह 4.90 डॉलर प्रति गैलन (105.73 रुपये प्रति लीटर) था. नई दिल्ली में डीजल की कीमत 89.62 रुपये प्रति लीटर है.

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सीधा असर भारतीय बाजार पर

एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल के दाम में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय बाजार में इसके दामों पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि देश में रिफाइनिंग क्षमता अच्छी है. ऐसे में आपूर्ति की समस्या नहीं होगी लेकिन देश में जिन पैमानों पर डीजल के दाम तय होते हैं, उनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत सबसे ऊपर है. ऐसे में अगर दुनिया में डीजल महंगा हुआ तो भारत में भी कीमत बढ़ सकती है.

ट्रांसपोर्ट और कृषि क्षेत्र में डीजल की सबसे ज्यादा खपत

भारत में डीजल की सबसे ज्यादा खपत परिवहन और कृषि क्षेत्र में होती है. महंगाई का सबसे ज्यादा असर इन्हीं दो सेक्टरों पर पड़ता है. डीजल के दाम बढ़ने से इसे खेती से बाजार में लाना महंगा हो जाता है. इससे आम आदमी और किसान दोनों का बजट बिगड़ सकता है.

पेट्रोल और डीजल के आज के भाव

पिछले 5 महीने से ज्यादा समय से देश में तेल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं. हालांकि, जुलाई में महाराष्ट्र में पेट्रोल 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता हुआ लेकिन अन्य राज्यों में कीमतें जस की तस रहीं.

शहर  पेट्रोल   डीजल

दिल्ली 96.72   89.62
मुंबई 106.31    94.27
भोपाल 108.65   93.90
जयपुर 96.20    93.72
चंडीगढ़ 96.20    84.26
रायपुर 102.45   95.44

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Pravesh Chauhan
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मेरा नाम प्रवेश चौहान है. मीडिया लाइन में पिछले 4 वर्ष से काम कर रहा हूँ. मैंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.