दलहन की फसलों में बढ़ रहा है किसानों का रुझान, जल संरक्षण के साथ मिलेंगे अनेक फायदे

यमुनानगर | जल संरक्षण व जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से हरियाणा में इस बार दलहन की फसलों की बिजाई पर पूरा जोर दिया जा रहा है. राज्य में कई जगहों से जागरूक किसान सरकार की इस पहल में अपना योगदान दे रहे हैं और पूरे प्रदेश में एक लाख हेक्टेयर भूमि पर बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यमुनानगर जिले की बात करें तो यहां मूंग, उड़द, हरहर की खेती होती है. घाड़ क्षेत्र में कुछ लोग पुल्थी भी उगाते हैं. यहां पर दो हजार हेक्टेयर भूमि पर बिजाई का लक्ष्य रखा गया है.

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Moong Dal

यह होगा फायदा

धान की जगह पर ही जून- जुलाई में इन फसलों की बिजाई कर बड़ी मात्रा में पानी को बचाया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि एक- दो सिंचाई में ही दलहन की फसलें पककर तैयार हो जाती है. इन फसलों में पानी की जरूरत नाममात्र ही होती है. इन फसलों की बिजाई से जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है. इनकी जड़ों में ग्रंथियां होती हैं जोकि नाइट्रोजन की आपूर्ति करती है. इससे खरपतवार भी नियंत्रित होता है. वहीं दलहन फसलों के आसमान छूते भाव को देखते हुए भी किसानों को अच्छी खासी आमदनी हो सकती है.

किसानों के लिए फायदेमंद

उप निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, डॉ जसविंद्र सैनी ने बताया कि दालों की खेती किसानों के लिए हर तरफ से फायदेमंद साबित हो रही है. इन फसलों की बिजाई कर किसान आर्थिक रुप से समृद्ध हो सकते हैं और साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि जिलें में लक्ष्य से बढ़कर दलहन की फसलों की बिजाई होगी.

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