चंडीगढ़ | हरियाणा में किसानों से जुड़ी एक और अच्छी खबर सामने आई है. बता दें कि राज्य में औद्योगिक विकास और 10 न्यू औद्योगिक टाउनशिप (IMT) विकसित करने के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी में संशोधन पर सहमति बन गई है. नई नीति में किसानों को मुआवजे के तीन विकल्प मिलेंगे. पहला औद्योगिक विकास और नई IMT बनाने के लिए किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन पर 50% हिस्सा मिलेगा.

किसानों को मिलेंगे 3 ऑप्शन
दूसरा किसान बाजार दर के हिसाब से मुआवजा ले सकते हैं. तीसरा किसान किसी अन्य स्थान पर 1200 वर्ग मीटर प्लॉट दो- तीन हिस्सों में या एकमुश्त बड़ा प्लॉट ले सकेंगे. इस संशोधित पॉलिसी को मंजूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा.
प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि ई-भूमि पोर्टल पर जमीन की अलग- अलग दर की मांग और जगह-जगह जमीन पर विवाद के चलते सरकार ने किसानों को भागीदार बनाने का फैसला लिया है. इसमें सरकार, उद्योग और किसान तीनों की जरूरतों के मद्देनजर बदलाव किया गया है ताकि IMT या औद्योगिक विकास में किसी तरह की अड़चन न आएं. सीएम नायब सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है.
यहां स्थापित होंगे नए IMT
सूबे की नायब सैनी सरकार प्रदेश में 10 नए IMT विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. इनमें अंबाला, नारायणगढ़, जींद, सिरसा, हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, नारनौल, सोहना और पलवल शामिल हैं. इनमें जींद जिले में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट दिल्ली- कटरा एक्सप्रेसवे और NH-152D के करीब 12 हजार एकड़ ज़मीन पर प्रस्तावित है.
नारायणगढ़ में मिलेगा इतना मुआवजा
IMT स्थापित करने की दिशा में नारायणगढ़ क्षेत्र के किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात कर जमीन देने पर सहमति जताई थी. किसानों ने सरकार की ओर से तय दरों पर अपनी भूमि देने की बात कही है जिससे करीब 450 एकड़ भूमि उपलब्ध होगी. प्रदेश सरकार ने नारायणगढ़ में करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ का रेट निर्धारित किया है.