हरियाणा में निकाय चुनावों पर अभी भी संशय बरकरार, सरकार के दावे बने हवा- हवाई; यहाँ होंगे इलेक्शन

चंडीगढ़ | हरियाणा में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) निकाय चुनावों की तैयारी में भले ही जुट गई हो, लेकिन अभी भी हकीकत यह है कि इन चुनावों में कम- से- कम 6 महीने का और समय लग सकता है. बीते सप्ताह ही सरकार द्वारा विधानसभा में निगम पालिका और पंचायती राज में संशोधन विधेयक पारित किया गया है, जिसके बाद से अब निकाय विभाग को नए सिरे से इन 35 समेत बाकी सभी निकायों में सीटों को आरक्षित करना होगा, जिसमें तीन से चार महीने लग सकते हैं.

Election Vote

अभी लग सकता है और 6 महीने का समय

प्रक्रियाओं को पूरा करने में भी डेढ़ से 2 महीने का लग सकता है. इस लिहाज से अगर देखा जाए, तो कुल मिलाकर 6 महीने का और भी समय लगने की संभावना है. हालांकि, पिछले दिनों में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी निगम चुनाव जल्द करवाए जाने के बारे में कह चुके हैं. बता दें कि प्रदेश के आठ नगर निगम में चुनाव होने हैं, जिनमें मानेसर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल, पानीपत, रोहतक, यमुनानगर और हिसार शामिल हैं. वहीं. सोनीपत व अंबाला निगम में भी चुनाव संपन्न करवाए जाएंगे.

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यहाँ हैं चुनाव लंबित

सिरसा नगर परिषद, अंबाला सदर, थानेसर, पटौदी मंडी नगर परिषद के अलावा बबराड़ा, बवानीखेड़ा, लोहारू, जाखल, रादौर, कालांवली, खरखौदा, कलानौर, हथीन, तारू, कैनाना, अटेली मंडी, नीलोखेड़ी, इंद्री, पुंडरी, सिवान, कलायत, जुलाना, बेरी, नारनौंद, आदमपुर, फारुख नगर और सिवानी नगर पालिकाओं में भी चुनाव संपन्न करवाए जाएंगे.

29 से अधिक निकाय की वार्ड बंदी का काम हो चुका है और 6 निकायों की वार्ड बंदी का काम अभी अधूरा है. जिन नगर निगमों या नगर पालिकाओं में चुनाव पेंडिंग हैं, वहां के शहर के विकास कार्य बुरे तरह से डगमगा चुके हैं. हाल यह है कि जनता की समस्याएं सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा, पेयजल, नालों, सडकों और गलियों संबंधित समस्याएं बढ़ती जा रही है.

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Nisha Tanwar
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