चंडीगढ़ | हरियाणा में फिर चुनाव का बिगुल बजेगा. पंचकूला नगर निगम में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग को आरक्षण पर विवाद के चलते प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव पर छाए संकट के बादल अब हट गए हैं. हाईकोर्ट के आदेश को अमलीजामा पहनाते हुए स्थानीय निकाय विभाग ने आनन- फानन में अधिसूचना जारी करते हुए पंचकूला में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए फिर से 3 वार्ड आरक्षित कर दिए हैं.

मई के पहले सप्ताह में चुनाव की संभावना
आरक्षण के लिए साल 2011 की जनसंख्या को आधार बनाया गया है क्योंकि हरियाणा परिवार पहचान अधिनियम के आधार पर एससी के लिए तीन सीटें आरक्षित करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.
प्रदेश में सात स्थानीय निकायों के आम चुनाव और छह निकायों में उपचुनाव होने हैं. इसके अलावा विभिन्न ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंचों, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों की रिक्त सीटों पर भी उपचुनाव कराया जाएगा. राज्य चुनाव आयोग की योजना अप्रैल अंत तक चुनाव कराने की थी, जिसके लिए मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है लेकिन हाईकोर्ट में आरक्षण के विवाद के चलते चुनाव लटक गया. अब मई के पहले पखवाड़े में यह चुनाव करवाए जा सकते हैं.
इन जगहों पर होंगे चुनाव
तीन नगर निगमों अंबाला, सोनीपत और पंचकूला के साथ ही रेवाड़ी नगर परिषद और धारूहेड़ा (रेवाड़ी), सांपला (रोहतक) तथा उकलाना (हिसार) नगर पालिकाओं के आम चुनाव होने हैं. नगर परिषद के लिए टोहाना (फतेहाबाद) और झज्जर तथा चार नगर पालिकाओं राजौंद (कैथल), तरावड़ी (करनाल), साढौरा (यमुनानगर) और कनीना (महेंद्रगढ़) में रिक्त पदों के लिए उपचुनाव होना है. वहीं, पंचायती राज संस्थाओं में रिक्त 540 पदों पर उपचुनाव होगा.
प्रत्याशी पसंद नहीं आया तो नोटा को दे सकेंगे वोट
निकाय चुनाव में प्रत्याशी पसंद नहीं आया तो मतदाता नोटा (उपरोक्त में कोई नहीं) को वोट दे सकेंगे. राज्य चुनाव आयोग की ओर से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर नोटा को कल्पित चुनाव प्रत्याशी के रूप में दर्शाया जाएगा. अगर नोटा को सभी प्रत्याशियों से अधिक वोट मिलते है तो ऐसी स्थिति में दोबारा चुनाव कराया जाएगा. नोटा से हारने वाला कोई प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ सकेगा.