चंडीगढ़ | हरियाणा में बिजली की डिमांड में निरंतर वृद्धि हो रही है. मगर बिजली निगमों में उसके अनुसार व्यवस्था संभालने के लिए कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं. दोनों बिजली निगमों में करीबन 50 फीसदी पद रिक्त पड़े हुए है. उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHVBN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) में कुल 40,294 पद स्वीकृत हैं, मगर इनमें से 21,575 पद ही भरे गए हैं. दोनों निगमों में अभी 18,769 पद रिक्त पड़े हुए है.

हो रहा लगातार इजाफा
हालत ये है कि राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था मात्र आधी मैनपावर के सहारे चल रही है. बिजली विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, यूएचबीवीएन में 17,956 स्वीकृत पदों में से 10,564 पद ही भरे गए हैं, जबकि डीएचबीवीएन में 22,338 स्वीकृत पदों में से 11,011 पर ही कर्मचारी कार्य कर रहें है. दक्षिण हरियाणा में तो प्रत्येक दो में से एक पद खाली है. वहीं, पूरे राज्य में बिजली कनेक्शन और लोड की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है.
शिकायतों के समाधान में देरी
प्रदेश सरकार ने हारट्रोन, एचकेआरएन के जरिये अस्थायी राहत देने का प्रयास कर रही है और अब तक 10,948 कर्मचारी तैनात किए गए हैं. पर विशेषज्ञों का मानना है कि यह समाधान अस्थिर और अल्पकालिक है. प्रशिक्षण प्राप्त और स्थायी कर्मचारियों की कमी के चलते उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान देरी से हो रहें है और तकनीकी समस्याएं लंबे वक़्त तक बनी रहती हैं.
साल 2024- 25 के दौरान अब तक 60.981 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली की बिलिंग की जा चुकी है. इसमें सबसे ज्यादा खपत परेलू उपभोक्ताओं द्वारा 18,213 एमयू (29.87%), फिर औद्योगिक उपभोक्ताओं की तरफ से 22,446 एमयू और कृषि उपभोक्ताओं द्वारा 10,581 एमयू रही है.
वक़्त पर नहीं मिल पाती सेवाएं
जहां एक तरफ उपभोक्ताओं और खपत में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी तरफ फील्ड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की संख्या वही बनी हुई है. फील्ड तकनीशियन, लाइनमैन, मीटरिंग वर्कर्स और मेंटेनेंस स्टाफ या तो लिमिटेड हैं या अनुबंध आधारित हैं, जिससे सेवाएं वक़्त पर नहीं मिल पाती और तकनीकी खामियां बनी रहती हैं.