हरियाणा में लंपी बीमारी को लेकर एक्शन मोड में खट्टर सरकार, उठाया बड़ा कदम

चंडीगढ़ | हरियाणा में पशुओं में फैली लंपी स्किन बीमारी को फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है. बीमारी से प्रभावित जिलों में गोवंश को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने पर रोक लगा दी गई है. पशुओं की बिक्री अथवा किसी दूसरे जिलें या राज्य में ले जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. बीमारी से ग्रस्त पशुओं को अन्य सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं.

Lumpy Virus

पूरे प्रदेश में गंभीर समस्या बन चुकी लंपी स्किन बीमारी को लेकर मुख्य सचिव संजीव कौशल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तो के साथ बैठक की. इस दौरान उन्होंने कहा कि पशु मेलों पर प्रतिबंध के साथ ही उपायुक्त अपने जिले में सुनिश्चित करें कि किसी गोशाला या किसी व्यक्ति द्वारा संक्रमित पशु को बेसहारा न छोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह में 100 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया जाएं. फिलहाल प्रदेश में तीन लाख डोज उपलब्ध है, जिन्हें दो दिन के भीतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए. अगले सप्ताह तक 5 लाख डोज उपलब्ध हो जाएगी.

संजीव कौशल ने बताया कि प्रदेश के 8 जिलें सिरसा, फतेहाबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला, पंचकूला और यमुनानगर में लंपी स्किन बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि संक्रमित पशु की सूचना मिलते ही सबसे पहले उस स्थान के आसपास के क्षेत्र में रिंग-वैक्सीनेशन अवधारणा के अनुरूप वैक्सीनेशन किया जाएगा और तीन एमएल डोज पशुओं को लगाई जाएगी. इसके अलावा अन्य गांवों या क्षेत्र में एक एमएल की डोज लगाई जाएगी.

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उबालकर पी सकते हैं दूध

मुख्य सचिव संजीव कौशल ने पशुपालन विभाग को तुरंत एडवाइजरी जारी करने के निर्देश देते हुए कहा है कि जनता को बताएं कि संक्रमित गाय के दूध को अच्छी तरह से उबालकर पीया जा सकता है. इसके अलावा संक्रमित पशु की मौत होने पर उसे 10 फीट तक गहरे गड्ढे में दबाएं. इसके अलावा सभी गौशालाओं में मक्खियों और मच्छरों पर नियंत्रण पाने के लिए फॉगिंग करने के निर्देश दिए गए हैं.

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मुख्य सचिव संजीव कौशल ने कहा कि पशुपालन विभाग तुरंत बीमारी की जानकारी, रोकथाम और पशुओं की देखभाल से संबंधित एडवाइजरी जारी कर लोगों को बताएं कि घबराने की जरूरत नहीं है. यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है क्योंकि यह गैर-जूनोटिक बीमारी है. आप बिना किसी डर के अपने पशुओं की देखभाल कर सकते हैं. बीमारी से ग्रस्त पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखा जाएं. उन्होंने कहा कि दवा की उपलब्धता और मांग की जानकारी पोर्टल पर प्रतिदिन अपडेट की जाएगी.

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