अनिल विज ने किसान आंदोलन पर किए सवाल खड़े, आंदोलन को दी गदर की संज्ञा

चंडीगढ़ । हरियाणा के स्वास्थ्य एवं गृहमंत्री अनिल विज ने मंगलवार को एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर तीखी टिप्पणी व्यक्त की है.अनिल विज ने किसान आंदोलन पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इस आंदोलन को अब आंदोलन की संज्ञा नहीं दी जा सकती ,इसे गदर कहा जा सकता है या किसी और नाम से भी पुकारा जा सकता है. उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान लोग भुख हड़ताल करते हैं , सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हैं लेकिन आंदोलन में आंदोलनकारी लाठी और तलवारें लेकर नहीं आते हैं.

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गृहमंत्री विज ने कहा कि इतिहास में पहले भी कई आंदोलन हुएं हैं जिसमें लोगों ने विरोधस्वरूप भूख-हड़ताल की और कई लोगों को भूख-हड़ताल की वजह से अपनी जान तक गंवानी पड़ी. इस आंदोलन में आंदोलन के नाम पर गदर मचाया जा रहा है इसलिए इस आंदोलन को आंदोलन कति नहीं कहा जा सकता है.

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कैप्टन अमरिंदर पर बोला हमला

अनिल विज यही नहीं रुके और उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी निशाना साधा. पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विज ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर ये बोल रहे हैं कि किसान जो भी करना चाहते हैं , हरियाणा और दिल्ली जाकर करें. एक मुख्यमंत्री के तौर पर उनका ये बयान बेहद गैरजिम्मेदाराना है.

गृहमंत्री विज ने कहा कि उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो रहा है कि इस आंदोलन के पीछे कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा छिपी हुई है. ये पूरा आंदोलन कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रायोजित है और कांग्रेस भोले-भाले किसानों को बरगलाने का काम कर रही है.

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कैप्टन ने दिया था यें बयान

बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए किसानों से कहा था कि पंजाब में 113 स्थानों पर चल रहे उनके आंदोलन से राज्य की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही है. इसलिए वें दिल्ली की सीमाओं पर जाकर केन्द्र सरकार पर दबाव बनाएं. मैं किसान साथियों से अनुरोध करता हूं कि ये आपका अपना पंजाब है , आपके गांव है, आपके लोग हैं. आप दिल्ली की सीमाओं पर जो करना चाहते हैं वो करें , वहां रहकर केन्द्र सरकार पर दबाव डाला जाएं और उन्हें अपनी मांगे मनवाने के लिए सहमत किया जाएं.

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गौरतलब है कि बीते साल 26 नवंबर से तीनों कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन चल रहा है. इस दौरान कई दौर की बातचीत भी हुई लेकिन समाधान नहीं निकला. किसान कृषि कानूनों को रद्द करने व एमएसपी पर कानून बनाने की बात पर अडिग है तो वही कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने स्पष्ट कहा है कि सरकार कृषि कानूनों में संशोधन करने को तैयार हैं लेकिन कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा.

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