चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से एक फैसले में साफ किया गया कि किसी कर्मचारी को उसकी शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित कैडर से बाहर पोस्ट करना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि जनहित के भी विरुद्ध हो सकता है. कोर्ट द्वारा महेंद्र सिंह नामक याचिकाकर्ता के मामले में 10 अगस्त 2022 के ट्रांसफर आदेश को कैंसिल करते यह टिप्पणी व्यक्त की है.
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की सिंगल बेंच के सामने यह मामला आया जिसमें याचिकाकर्ता को जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के पद से हटा कर नगर निगम पानीपत में बिल्डिंग इंस्पेक्टर पद पर ट्रांसफर किया गया था. याचिकाकर्ता की ओर से दलील पेश की गई कि यह पोस्टिंग न सिर्फ उसकी योग्यता के विपरीत है बल्कि हरियाणा म्युनिसिपल कारपोरेशन सर्विस रूल्स, 1998 का भी उल्लंघन करती है. कोर्ट ने रिकार्ड का अवलोकन करते हुए देखा कि जूनियर इंजीनियर (सिविल), मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल तीन अलग-vअलग कैडर हैं और इनके लिए अलग- अलग शैक्षणिक योग्यता तय की गई है.
इस प्रकार ट्रांसफर नियमों के विरुद्ध
आर्डर में स्पष्ट कहा गया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री रखने वाले व्यक्ति को सिविल कामों से जुड़े बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त करना नियमों के अनुरूप नहीं है. पीठ ने यह भी माना कि इस प्रकार की पोस्टिंग से न सिर्फ कार्य की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि इससे सार्वजनिक हित को भी नुकसान पहुंचने की आशंका होती है. ऐसे में कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस प्रकार के ट्रांसफर नियमों के अनुरूप नहीं है.
