चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की खंडपीठ की तरफ से 57 रिव्यू याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 24 ग्रुप की भर्तियों को लेकर फैसला सुनाया गया है. कोर्ट ने रिव्यू याचिकाओं को वैध ठहराते हुए पहले रद्द किए गए सिलेक्शन को बहाल कर दिया है. 10 हजार से ज्यादा चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है. इन उम्मीदवारों की नौकरी पर पिछले दो साल से अनिश्चितता बनी हुई थी. सामाजिक व आर्थिक आधार पर अंकों के मामले में सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को हाई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.
हरियाणा भर्ती विवाद में बड़ा ट्विस्ट
हरियाणा के एडवोकेट जनरल परविंदर चौहान व एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव कौशिक ने इस मामले में पैरवी करते हुए कोर्ट से अपने पहले के आदेश पर विचार करने का आग्रह किया गया था. खंडपीठ द्वारा साफ किया गया कि इन 24 ग्रुप में सामाजिक- आर्थिक मानदंड (सोशियो- इकोनॉमिक क्राइटेरिया) के अंक का कोई इफेक्ट फाइनल सिलेक्शन लिस्ट पर नहीं पड़ा था इसलिए इन भर्तियों को रद्द करना सही नहीं था. कोर्ट का कहना है कि पहले के फैसले में कुछ तथ्यों को गलत तरीके से सभी ग्रुप पर लागू कर दिया गया था जबकि वास्तविक स्थिति ऐसी नहीं थी.
रद्द चयन फिर से बहाल
अगर पूरे मामले की बात करें तो हरियाणा सरकार ने 5 मई 2022 को सीईटी नीति लागू की थी जिसके तहत ग्रुप सी और डी की भर्तियां होनी थीं. इसमें सामाजिक- आर्थिक आधार पर 5 अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान था. इसे हाई कोर्ट ने नवंबर 2023 में अस्थायी रूप से रोक दिया था और 31 मई 2024 को इसे असंवैधानिक बताते हुए पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी थी. राज्य सरकार की एसएलपी भी सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई थी. जिन चयनित अभ्यर्थियों पर इसका प्रभाव पड़ रहा था उन्होंने रिव्यु याचिकाएं दाखिल की थीं.
जारी रख सकेंगे अपनी सेवाएं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देखा कि 24 ग्रुप में अभ्यर्थियों की संख्या पदों के मुकाबले कम थी इसलिए सभी योग्य उम्मीदवारों को सीईटी 2 में बैठने का अवसर दिया गया था. वहां किसी को सामाजिक- आर्थिक अंक नहीं दिए गए. आयोग द्वारा दिए गए एफिडेविट में भी स्पष्ट किया कि सिलेक्शन लिस्ट में ऐसे अंक का कोई प्रभाव नहीं था.
कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि पहले निर्णय के दौरान चयनित अभ्यर्थियों की पक्षकार नहीं बनाया गया था और उन्हें सुने बिना उनकी नियुक्तियां रह कर दी गई जिससे उन्हें सच में नुकसान हुआ है. कोर्ट ने अपने आर्डर में कहा कि इन 24 ग्रुप में चयनित और नियुक्त उम्मीदवार अपनी सेवाएं जारी रख पाएंगे और उनके विरुद्ध किसी नई भर्ती की जरूरत नहीं है. हालांकि, ग्रुप 56 और 57 से संबंधित पहले का फैसला वैसा ही रहेगा.
