चंडीगढ़ | हरियाणा में तालाबों की जमीन पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ अब प्रदेशभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की सख्ती के बाद हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीडब्ल्यूडब्ल्यूएमए) ने सभी 22 जिलों के उपायुक्तों को अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं. सरकार को 22 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई से पहले हाई कोर्ट में कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करनी है. प्राधिकरण के आदेश जारी होने के बाद जिलों में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.

उपायुक्तों ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों (DDPO) और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों (BDPO) को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. कई ब्लॉकों में सरपंचों और ग्राम सचिवों से तालाबों की मौजूदा स्थिति और अतिक्रमण संबंधी रिपोर्ट भी मांगी गई है.
200 से अधिक तालाबों का उल्लेख
हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण अधिनियम- 2018 की धारा 15(2) के तहत तालाबों की भूमि पर किए गए अवैध निर्माण और कब्जों को हटाने के लिए प्रशासन के पास विशेष अधिकार हैं. इसके तहत लंबी कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किए बिना भी कार्रवाई की जा सकती है. सरकार की अमृत सरोवर और मॉडल तालाब योजनाओं के तहत विकसित किए जा रहे कई तालाब भी अतिक्रमण की चपेट में पाए गए हैं. कैथल जिले में 200 से अधिक ऐसे तालाबों का उल्लेख किया गया है, जो अमृत सरोवर और मॉडल पोंड योजना के अंतर्गत आते हैं. प्राधिकरण ने साफ किया है कि अब इन सभी तालाबों को समयबद्ध तरीके से अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा.
निर्देश जारी
सभी जिलों को अपने- अपने क्षेत्र के तालाबों की वर्तमान स्थिति, अवैध कब्जों की जानकारी और अब तक की गई कार्रवाई की समेकित रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. तय समय सीमा में कार्रवाई पूरी नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. कैथल की उपायुक्त अपराजिता ने भी जिले के डीडीपीओ और सभी बीडीपीओ को तालाबों की स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए हैं.