चंडीगढ़ । शहरी नियंत्रण क्षेत्र में स्थित इस गांव के लाल डोरा के बाहर बने लाखों मकानों को वैध नहीं दे पाने का मुद्दा अहम हो गया है. इसके मालिक न अपना घर बेच सकते हैं. न दूसरे का घर खरीद सकते हैं. न ही किसी बैंक से मकान पर ऋण ले सकते हैं.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार ने लाल डोरा के अंदर बने मकानों को स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक देकर और अर्बन कंट्रोल क्षेत्रों में बनी 1200 से अधिक अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू कर निस्संदेह लाखों लोगों का दिल जीतने का काम किया है. मगर राहत देने के इस काम में एक अहम मुद्दा है जिस पर राज्य सरकार का ध्यान नहीं गया है. वो मुद्दा है. शहर नियंत्रण क्षेत्र में स्थित इस गांव के लाल डोरा के बाहर बने लाखों मकानों को वेतन नहीं दे पाने का. इन मकानों के मालिकों ने अपना घर न बेच सकते हैं, और न दूसरा घर खरीद सकते हैं.
न ही किसी बैंक से इस मकान पर ऋण ले सकते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो जमीन के असली मालिक होते हुए भी लाखों लोग अपने ही घर के मालिक नहीं है. जिस गांव में शहर नियंत्रण क्षेत्र की धारा सात-ए लागू है, वहाँ पर बने किसी भी मकान की रजिस्ट्री नहीं हो सकती. प्रदेश में ऐसे गांवों की संख्या जहाँ सैकड़ों में है, वहीं मकानों की संख्या लाखों में है. धारा सात-ए इन्हें इन मकान मालिको की राह रोक रही है. इस धारा के तहत नियंत्रण क्षेत्र में बिना सीएलयू लिए बिना मकान अवैध है जबकि सीएलयू को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं.
अंग्रेजों के जमाने से लेकर आज तक गांव का विस्तार होता रहा, और लाल डोरा के बाहर गांव की आबादी का विस्तार होता गया. बिजली पानी जैसी सुविधाएं भी मिली, मगर रजिस्ट्री करवाने के लिए प्रॉपर्टी आईडी लेनी पड़ी, तो फिलहाल यह असंभव है. अर्बन एरिया के शहरों के निकट बसे गांव में स्थित 1000 मकान, उत्तर प्रदेश बिहार के उन लोगों की है जो लंबे समय से यहाँ रह रहे हैं. अगर इनमें से कोई मकान का विस्तार करने के लिए ऋण देना चाहें, या बेचकर अपने गांव जाना चाहे तो वर्तमान में यह संभव नहीं हो सकता. सरकार अगर इस गांव में लाल डोरा से बाहर बने मकानों को आउट कॉलोनी मानकर रेगुलर कर दे, अथवा प्रॉपर्टी आईडी आवंटित कर दी जाए, तो एक बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा.