विधायक दल की बैठक में बोले मनोहर लाल- पंचायत चुनाव करवाए जा सकते हैं लेकिन….

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चंडीगढ़ । मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज चंडीगढ़ में विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. बैठक में सरकार की विभिन्न योजनाओं को लेकर मंथन और उन्हें अमलीजामा पहनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं को आम आदमी तक पहुंचाने में मदद करें. परिवार पहचान पत्र योजना को लेकर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सरकार का टारगेट एक लाख परिवारों की आय में वृद्धि करना है.

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विधायक दल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह संगठन को चलाने की प्रक्रिया है. इसमें सरकार और संगठन के बीच आपस में फीडबैक लिया जाता है. बैठक में परिवार पहचान पत्र योजना के तहत एक लाख परिवारों की आय बढ़ाने के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई है. योजना को लेकर सर्वे और वैरिफिकेशन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं को सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं.

बैठक में माइक्रो इरिगेशन पर भी बातचीत हुई है. कार्यकर्ताओं को माइक्रो इरिगेशन को लेकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं. सरकार हर खेत तक पानी पहुंचाने के अपने वादे के प्रति प्रतिबद्ध है. मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामित्व योजना से भी लोगों में खुशी का माहौल है. लाल डोरा मुक्त होने पर लोगों को प्रोपर्टी का अधिकार मिल रहा है. इसके अलावा शहरी स्वामित्व योजना का भी लोगों को फायदा पहुंच रहा है. अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने पर भी बैठक में चर्चा हुई है.

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पंचायत चुनाव पर चर्चा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि बैठक के दौरान पंचायत चुनावों पर भी चर्चा हुई है. विधायकों ने कहा है कि माहौल चुनाव के अनुकूल है. इसलिए पंचायत चुनावों में ज्यादा देरी का कोई औचित्य नहीं बनता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 22 अगस्त को हाईकोर्ट में इस मसले पर सुनवाई होनी है, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.

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गुरनाम सिंह चढूनी पर निशाना

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी पर भी निशाना साधा है और कहा कि गुरनाम सिंह चढूनी के पंजाब में इलेक्शन लड़ने की बात करने से यह स्पष्ट हो गया है कि इस आंदोलन के पीछे राजनीतिक षड्यंत्र है. किसानों के हितों से इनका कोई लेना-देना नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भी नए कृषि कानूनों को सही बता रहे हैं. जहां पुराने कृषि कानूनों में किसान को मार्केट फीस चुकानी पड़ती थी तो अब नए क़ानूनो के तहत मार्केट फीस बंद हो गई है.

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