चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज बड़ी संख्या में किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर बागवानी और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इस दिशा में सरकार भी निरंतर नए प्रयास कर रही है ताकि किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जा सके. इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कृषि एवं बागवानी अधिकारियों के लिए एक नया निर्देश जारी किया है.

हरियाणा में प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
उन्होंने कहा है कि प्रदेश में स्ट्रॉबेरी, नींबू, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट की पैदावार के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान कर क्लस्टर विकसित किए जाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नए क्लस्टर विकसित किए जाए जहां किसानों को प्राकृतिक खाद बनाने का प्रशिक्षण मिले. जिन क्लस्टरों में किसान प्राकृतिक खेती अपनाते हैं और वहां उम्मीद से कम उत्पादन रहता है तो ऐसे क्लस्टर वाले किसानों के नुकसान की भरपाई प्रदेश सरकार द्वारा की जाएगी.
कृषि एवं बागवानी अधिकारियों की बैठक में सीएम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.40 लाख एकड़ सेम एवं लवणीय भूमि के सुधार का लक्ष्य निर्धारित किया. उन्होंने निर्देश दिए कि जैव निकास के तहत सफेदा (यूकेलिप्टस) के पौधे किसानों के खेतों की डोल पर, नहरों के किनारे तथा नालों की मेड पर बड़े पैमाने पर लगाएं जाएं ताकि जलभराव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पानी को प्राकृतिक रूप से कम किया जा सकें.
नई किस्में विकसित करने पर जोर
उन्होंने निर्देश दिए कि मिट्टी और जलवायु के अनुसार क्लस्टर आधारित खेती मॉडल विकसित किया जाएं. जिन फलों की बाजार में मांग और लाभकारी मूल्य ज्यादा है, उसका उत्पादन बढ़ाना समय की जरूरत है. उन्होंने अरहर, सोयाबीन, मूंगफली, दलहन तथा गन्ने के उत्तक संवर्धन आधारित उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए.
सीएम ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि नरमा कपास, सरसों, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली और दलहनी फसलों की नई संकर एवं अधिक उत्पादन देने वाली किस्में विकसित की जाएं. ऐसे बीजों और पौधों के अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए जो ओलावृष्टि, जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम के प्रभाव को सहन कर सकें.