झज्जर | देवभूमि हिमाचल प्रदेश का अघंजर महादेव मंदिर इन दिनों चर्चाओं में बना हुआ है. दरअसल, प्रयागराज महाकुंभ मेले से लाइमलाइट में आए IIT बाबा अभय सिंह ने इसी मंदिर में इंजिनियर प्रतीका संग सात फेरे लेकर अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की हैं. बता दें कि इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है.
अर्जुन ने की थी घोर तपस्या
मान्यता है कि अघंजर महादेव मंदिर वहीं जगह है जहां महाभारत काल में अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण के निर्देश पर भोलेनाथ की घोर तपस्या की थी. लोककथाओं के मुताबिक, खनियारा गांव के इसी पावन स्थल पर भगवान शिव ने प्रसन्न होकर अर्जुन को ‘पाशुपत अस्त्र’ प्रदान किया था, जिसने महाभारत के युद्ध में विजय का मार्ग प्रशस्त किया था.
कहा जाता है कि खुद भगवान शिव कैलाश पर्वत जाते समय इसी रास्ते से होकर गुजरते थे. इस मंदिर की सबसे रहस्यमई और आकर्षक विशेषता यहां पर बाबा गंगा भारती द्वारा स्थापित अखंड धूणा है जो पिछले 500 सालों से निरंतर प्रज्ज्वलित हैं.
चौंकाने वाली बात यह है कि इस धूणे को किसी ने जलते या बूझते नहीं देखा है. बस समय-समय पर इसमें लकड़ियां झोक दी जाती है. यहां श्रद्धालु बाबा गंगा भारती की समाधि और उनकी 500 साल पुरानी गद्दी के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं.
दिव्य ऊर्जा से प्रभावित हैं बाबा
प्रयागराज महाकुंभ मेले में अपनी आध्यात्मिक साधना से सुर्खियों में आए IIT बाबा अभय सिंह ने बताया कि वे कांगड़ा की इस दिव्य ऊर्जा से इतने प्रभावित हैं कि अघंजर महादेव के समीप ही अपना आश्रम स्थापित करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ संसार के कल्याण का अपना आध्यात्मिक मार्ग जारी रहेंगे.
