ज्योतिष डेस्क | हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पितरों के स्मरण और श्राद्धकर्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि इन दिनों श्रद्धा से किए गए तर्पण और धार्मिक कार्यों से पितर प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. इससे जीवन में सुख- शांति, तरक्की और मान- सम्मान बढ़ने की मान्यता है. पितृपक्ष के दौरान रोजाना कुछ खास बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है. आइए जानते हैं वे 6 काम कौन से हैं…
तो चलिए आज के आर्टिकल में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं… जिससे आप भी सभी कार्यों को आसानी से कर पाएंगे और पितरों का आर्शिवाद ले पाएंगे.
रोज करें तर्पण
पितृपक्ष में पितरों के लिए तर्पण करने की परंपरा है. हालांकि जिनके माता-पिता जीवित हैं, उनके लिए पितृ तर्पण का नियम लागू नहीं होता. ऐसे लोग सुबह पितरों और ईष्टदेव का ध्यान कर सूर्यदेव को जल अर्पित कर सकते हैं. जिनके माता-पिता में से किसी एक या दोनों का निधन हो चुका है, वे दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण कर सकते हैं. तर्पण के जल में दूध और तिल मिलाने की परंपरा है.
गाय को खिलाएं चारा और गौ ग्रास
पितृपक्ष में रोज गाय को हरा चारा और भोजन का एक हिस्सा यानी गौ ग्रास खिलाना शुभ माना जाता है. भोजन बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालने की परंपरा भी है. मान्यता है कि इससे पितरों की तृप्ति होती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.
दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक
पितृपक्ष के दौरान सुबह-शाम पितरों के नाम से दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों का संबंध दक्षिण दिशा से माना गया है. श्राद्धकर्म के समय भी इसी दिशा की ओर मुख करके पितरों का आह्वान किया जाता है.
घर और मुख्य द्वार रखें साफ
पितृपक्ष में घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. रोज सफाई के बाद मुख्य द्वार पर गंगाजल का छिड़काव करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा आती है और नकारात्मकता दूर होती है. स्नान के पानी में भी थोड़ा गंगाजल मिलाया जा सकता है.
घर में जूठे बर्तन न छोड़ें
पितृपक्ष के दौरान किचन या घर के किसी हिस्से में जूठे बर्तन रखने से बचना चाहिए. खासकर रात में जूठे बर्तन छोड़ना धार्मिक मान्यताओं में अशुभ माना जाता है. इसलिए इस दौरान घर को साफ और व्यवस्थित रखना जरूरी माना गया है.
रोज करें पितृ मंत्र का जाप
सुबह स्नान के बाद और रात में सोने से पहले पितृ मंत्र का जाप करने की मान्यता है. कहा जाता है कि श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और पितृदोष से मुक्ति की कामना की जाती है.
यह है मंत्र
ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्। ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Haryana E Khabar किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.
