कैथल | हरियाणा के कैथल जिले के पूंडरी- फतेहपुर की मशहूर फिरनी का स्वाद प्रदेश सहित अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और थाइलैंड जैसे देशों तक पहुंच चुका है. सावन के मौसम में इस खास मिठाई की मांग इतनी बढ़ जाती है कि कारीगर दिन- रात मेहनत करने के बाद भी ऑर्डर पूरे नहीं कर पाते. ऐसे में इसे सावन का सबसे स्वादिष्ट तोहफा भी कहा जाता है. पूंडरी के हलवाई पवन ने बताया कि फिरनी का सीजन करीब दो से ढाई महीने तक चलता है. इस दौरान दिन- रात काम करने के बावजूद मांग पूरी करना मुश्किल हो जाता है.

उन्होंने बताया कि फिरनी का मिश्रण तैयार करने से लेकर उसे बनाने तक की पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी से की जाती है तभी इसमें सही मिठास और बेहतरीन स्वाद आता है. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस खास मिठाई का आनंद लेते हैं.
कैथल की मशहूर फिरनी
पूंडरी- फतेहपुर में करीब 100 स्थानों पर प्रतिदिन लगभग 125 क्विंटल फिरनी तैयार की जाती है. इसमें से अधिकांश फिरनी रोजाना बिक जाती है. जींद, कुरुक्षेत्र, रोहतक, पानीपत, अंबाला समेत हरियाणा के कई जिलों से थोक व्यापारी यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. हर सीजन में कैथल से करीब 400 क्विंटल फिरनी विदेशों तक भेजी जाती है. विदेश भेजी जाने वाली फिरनी में चीनी की मात्रा कम रखी जाती है ताकि वह लंबे समय तक खराब न हो. इस मशहूर फिरनी का इतिहास भी काफी पुराना है.
सावन का स्वादिष्ट तोहफा
फतेहपुर गांव के दिवंगत हरिकिशन व्यास ने वर्ष 1936 में पूंडरी में फिरनी बनाने का काम शुरू किया था. ग्रामीणों के अनुसार शुरुआत गांव की एक छोटी सी दुकान से हुई थी, लेकिन आज इसकी पहचान पूरे देश और विदेशों तक बन चुकी है. उस समय अंग्रेज अधिकारी भी यहां से फिरनी लेकर जाते थे. सावन के सीजन में आज भी कई घरों में मेहमानों के स्वागत के लिए फिरनी जरूर रखी जाती है. हलवाइयों का कहना है कि पूंडरी क्षेत्र की फिरनी के स्वाद का सबसे बड़ा राज यहां का पानी है.
इस इलाके के पानी में शोरा नहीं होता जबकि करीब साढ़े चार किलोमीटर के दायरे से बाहर पानी में शोरे की मात्रा बढ़ जाती है. इसी कारण दूसरे क्षेत्रों में वैसा स्वाद नहीं मिल पाता. पूंडरी की फिरनी एक महीने तक खराब नहीं होती और विदेशों में रहने वाले लोग भी इसे अपने रिश्तेदारों के जरिए मंगवाना नहीं भूलते.
स्वाद का राज
फिरनी की फीकी किस्म की भी अच्छी मांग रहती है. शुगर के मरीजों के लिए बिना चीनी वाली फिरनी अलग से तैयार की जाती है. चिकित्सकों के अनुसार, फीकी फिरनी का सेवन शुगर मरीज भी कर सकते हैं. हलवाई संदीप ने बताया कि विदेशों से भी फिरनी की डिमांड आती है. फिरनी तैयार करने के लिए मैदा, घी और चीनी का खास मिश्रण बनाया जाता है.
आटे के प्रत्येक पीस को हाथों से गोल आकार देकर घी में पकाया जाता है और बाद में उस पर मीठा चढ़ाया जाता है. फिरनी एक दिन पहले तैयार की जाती है और अगले दिन खाने के लिए पूरी तरह तैयार होती है. यही पारंपरिक तरीका इसके खास स्वाद और पहचान को बरकरार रखे हुए है.