ज्यादा बारिश से कपास की फसल को खतरा, बस इन बातों का रखें ध्यान

कैथल । मानसूनी बारिश में कॉटन फसल की खेती करने वाले किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि अगर आपके कॉटन फसल वाले खेत में लगातार 4-5 दिन तक बरसात का पानी खड़ा रहता है तो पौधे सूखने की संभावना बढ़ जाती है. पौधों का निचला हिस्सा पीला होना शुरू हो जाता है. सभी किसान साथियों से अनुरोध है कि अपने खेत से पानी निकासी का उचित प्रबंध करें.

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बरसात का पानी अगर कॉटन फसल वाले खेत में अधिक जमा हो गया है तो उसे बाहर निकालें. इसके अलावा पौधों की जड़ों के साथ मिट्टी लगाएं ताकि पानी पेड़ की जड़ में ना पहुंचे. वहीं बरसात के बाद किसान प्रति एकड़ एक बैग यूरिया खाद का छिड़काव करें. सूखे हुए पौधों को उखाड़ कर जमीन में दबा दें ताकि पौधों को आगे सूखने से रोका जा सके.

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पानी जमा होने पर होती है यें समस्या

कॉटन फसल में पानी खड़ा होने पर टिंडे में कीड़ा लगना शुरू हो जाता है. पतों पर सफेद व पीलापन नजर आने लगता है. फूल खिलने से पहले ही टूट कर जमीन पर गिरना शुरू हो जातें हैं. पौधें सूखने लग जाते हैं और पौधा फूल बनाना कम कर देता है.इसके साथ ही मानसूनी बारिश में गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी, हरा तेला आदि बीमारियां आने की संभावना बढ़ जाती है.

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ऐसे करें निगरानी

कपास की फसल में रस चूसने वाले कीड़ों की निगरानी हेतु प्रति एकड़ 20 पौधों की तीन पतियों पर सफेद मक्खी, हरा तेला, थ्रिप्स चूरड़ा,की गिनती साप्ताहिक अंतराल पर करें. जुलाई माह में थ्रिप्स चूरड़ा का प्रकोप ज्यादा होता है . इसके प्रकोप से बचाव के लिए डाईमेथोएट 30 ईसी की 250-300 मिलीलीटर मात्रा को 120-150 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. हरा तेला रोग से बचाव हेतु 40 मिलीलीटर इमिडाकलोपिरड , कॉन्फीडोर 200 एसएम या थायामिथकसाम एकतारा 25 डब्लू जी को 120-150 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. गुलाबी सुंडी रोग से बचने के लिए प्रोफेनोफास 50 ईसी व तीन मिलीलीटर या किवनलफॉस 20 एएफ का छिड़काव करें.

कॉटन फसल वाले खेत में 4-5 दिन तक पानी खड़ा न रहने दें.इससे पौधा सूखना शुरू हो जाएगा. बरसात के मौसम में सुबह-शाम खेत की निगरानी करें. पानी निकासी का उचित प्रबंध करें: कर्म चंद, कृषि उप-निदेशक, कैथल

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