करनाल । गत शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यक्रम का विरोध कर रहे किसानों पर जमकर लाठियां भांजी गई थी और इस दौरान कई किसान गंभीर रूप से घायल हुए थे. वहीं इलाज के दौरान एक किसान की मौत हुई मौत के बाद किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. वहीं अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने दावा करते हुए कहा है कि पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज से किसान की मौत हुई है.
वहीं इस आरोप के बाद पुलिस भी मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आई. करनाल के एसपी गंगाराम पूनिया ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि किसान की मौत हार्ट अटैक से हुई है.
बता दें कि करनाल में प्रदर्शन के दौरान वहां के एसडीएम का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह पुलिसकर्मियों को सीधा किसानों का सिर फोड़ने के आदेश जारी कर रहे हैं. इसके बाद करनाल के बसताड़ा टोल पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज हुआ था जिससे कई किसानों को चोटें पहुंची थी. इस घटना के बाद अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने सुशील काजल निवासी रामपुर जट्टा गांव के किसान की मौत पर पुलिस के रवैए पर सवालिया निशान खड़े किए हैं. वहीं इस मामले पर सफाई देते हुए करनाल के एसपी गंगाराम पूनिया ने कहा है कि उक्त किसान लाठीचार्ज के बाद किसी भी अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ था. वह ठीक-ठाक अवस्था में घर गया और सोते समय ह्रदय गति रुकने से उसकी मृत्यु हो गई थी.
कुछ लोग जो ये कह रहे हैं कि पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की वजह मृत्यु हुई है , ये सभी खबरें आधारहीन है और झुठ फैलाया जा रहा है. एसपी ने कहा कि अगर इन बातों में सच्चाई होती तो परिवार के सदस्य पुलिस के पास जरुर आते लेकिन हमें ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है. इन दोनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध नहीं है. वहीं अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के महासचिव डॉ आशीष मितल का आरोप है कि एसडीएम के आदेश पर बसताड़ा टोल पर पुलिस ने किसानों पर लाठियां बरसाई है . शुक्रवार रात में ही किसान सुशील ने चोट लगने की वजह से दम तोड़ दिया था.
