आटा चक्की चलाने वाले के बेटे ने किया प्रदेश का नाम रोशन, बना न्यूक्लियर साइंटिस्ट

हिसार | हरियाणा के हिसार जिले के मुकलान गांव के एक आटा चक्की चलाने वाले के बेटे ने हरियाणा का नाम रोशन कर दिया है. पारिवारिक मुश्किलों के बावजूद इस युवक ने न्यूक्लियर साइंटिस्ट बन कर जिले व प्रदेश में मिसाल कायम की है. गांव के युवक अशोक का सिलेक्शन भामा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में हुआ है. भामा एटॉमिक रिसर्च सेंटर रिक्रूटमेंट की परीक्षा अशोक ने दी थी.

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हासिल किया ऑल इंडिया सेकंड रैंक

परीक्षा के बाद इंटरव्यू दिसंबर में हुआ. इंटरव्यू के पश्चात ओवरऑल रिजल्ट जारी हुआ. इस रिजल्ट में अशोक कुमार की ऑल इंडिया रैंक सेकंड आई है. भामा एटॉमिक रिसर्च सेंटर की तरफ से 5 जनवरी को परिणाम घोषित किया गया है. अशोक ने कहा कि लगभग 30 छात्रों का सिलेक्शन पूरे देश से हुआ है और इसमें उसका भी नाम है. अशोक के पिता का नाम मांगेराम है. उनके पास 1 एकड़ भूमि है और वह अपने परिवार का पेट आटा चक्की चला कर पालते हैं.

सपना है डॉक्टर अब्दुल कलाम के जैसा बनने का

अशोक के माता-पिता को उसकी इस उपलब्धि पर गर्व है. अशोक के पिता मांगेराम ने कहा है कि शुरू से ही अशोक पढ़ाई में होनहार था. पैसे की कमी के कारण उसे एक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाया गया. अशोक अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर ही आगे बढ़ा है. अशोक कुमार ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपनी माता कलावती और पिता मांगे राम को दिया है. अशोक तीन-भाई बहन है. जिनमें वह सबसे बड़ा है. अशोक का एक छोटा भाई है जिसका नाम विनोद है और एक छोटी बहन है इसका नाम ऋतु है. अशोक का सपना है कि वह डॉक्टर अब्दुल कलाम के जैसा वैज्ञानिक बने. उसने कहा कि वह अब्दुल कलाम की फोटो को टीवी और अखबारों में अपने बचपन से ही देखता है और हमेशा से ही उनके जैसा बनने के बारे में सोचता है.

इस प्रकार ली प्रारंभिक शिक्षा

गांव के सरकारी स्कूल में अशोक ने दसवीं तक की शिक्षा ग्रहण की. उसके बाद उसने एक प्राइवेट स्कूल से 11वीं और 12वीं non-medical से की. इसके पश्चात उसने बीटेक मैकेनिकल की. डॉक्टर अब्दुल कलाम जैसा बनने का सपना लिए मार्च 2020 में अशोक ने भामा एटॉमिक रिसर्च सेंटर रिक्रूटमेंट की परीक्षा दी. परीक्षा के पश्चात इंटरव्यू लिया गया और इसके बाद फाइनल रिजल्ट जारी किया गया. अब अशोक ने बताया कि मुंबई में 16 जनवरी को उनकी ट्रेनिंग होगी. वीरवार को इसके लिए वह अपने गांव से रवाना हो जाएंगे.

हमेशा रखा आपने पढ़ाई की ओर फोकस

अशोक ने कहा कि इस परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने प्रतिदिन 12 घंटे पढ़ाई की. वह सोशल मीडिया टीवी से दूरी बनाए रहा और रेगुलर किताबें और अखबार पढ़ी. अशोक ने कहा कि जब भी उन्हें कोई परेशानी होती थी तो वह डॉक्टर अब्दुल कलाम की जीवनी को पढ़ते थे इससे उन्हें बहुत अधिक प्रेरणा मिलती थी.

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Sahil Maurya
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