नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लोगों का घर बनाने का सपना अब पूरा होने वाला है. बता दें कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने भवन निर्माण पर लगने वाले आधारभूत शुल्क में बड़ी कटौती का फैसला लिया है. पहले 200 वर्ग मीटर से बड़ी जमीन पर भवन निर्माण करने पर लगने वाला आधारभूत शुल्क बहुत अधिक था. अब यह उपयोग के आधार पर लगेगा.

खाली जमीन को नहीं किया जाएगा शामिल
पहले आधारभूत शुल्क जमीन के आकार के आधार पर लगता था, अब सिर्फ निर्माण के आधार पर लगेगा. पुनर्निमाण में जल आवश्यकता नहीं बढ़ने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. कई कॉलोनियों में IFC चार्ज पर 50% तक की छूट दी जाएगी. G और H श्रेणी की कॉलोनियों में यह राहत 70% तक पहुंच सकती है. इससे छोटे मकानों, फ्लैटों और मिडिल क्लास परिवारों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है.
जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि 200 वर्ग मीटर जमीन पर नया घर बनाने पर दिल्ली जल बोर्ड पानी और सीवर कनेक्शन के लिए शुल्क लेता है. पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा इस शुल्क को पानी के उपयोग के आधार पर लिया जाता था
आम आदमी पार्टी की सरकार आने पर इसे बदल कर जमीन के आकार के आधार पर वसूला जाने लगा था, जिससे इसमें अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई थी, जो लोगों के लिए चिंता का विषय बन चुका था. अब सरकार ने फिर से पानी के उपयोग के आधार पर यह शुल्क लेने का फैसला लिया है. अब संपत्ति का मालिक जो अपने दस्तावेज में जानकारी देगा, उसके आधार पर शुल्क निर्धारित होगा.
क्या होता है आधारभूत शुल्क
जब कोई व्यक्ति नया मकान बनाता है या बिल्डिंग का नक्शा पास करवाता है. तब सरकार की एजेंसियां सड़क, सीवर, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के नाम पर एक शुल्क लेती है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज या IFC कहा जाता है. अब शुल्क में कमी आने से नक्शा पास कराने का खर्च घटेगा और निर्माण लागत कम होगी. इसके साथ छोटे व मध्यम प्लॉट मालिकों को राहत मिलेगी. इसके अलावा, अवैध निर्माण कम होने की उम्मीद है.