Success Story: डिप्रेशन से ड्रीम कैफे तक, वाव इडली के किशन तांती की दिलचस्प जर्नी; 6 महीने में बदली तकदीर

नई दिल्ली, Success Story | झारखंड के धनबाद जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे किशन तांती की कहानी शुरू से ही स्ट्रगल भरी रही है. साधारण परिवार, पिता गली-मोहल्लों में गोलगप्पे बेचकर घर चलाते थे. पढ़ाई 12वीं तक ही हो सकी, क्योंकि जिम्मेदारियों का बोझ पहले ही कंधों पर आ चुका था. कभी 40 रुपये रोज की कंपाउंडर की नौकरी, तो कभी लैब में काम किया. फिर कैमरा लेकर शादी-ब्याह में फोटो और वीडियो शूटिंग की. यहां तक कि यूट्यूब चैनल भी बनाय, मगर चैनल किसी कारणवश बंद हो गया.

ना कामयाबी मिली, ना स्थिरता… हर ओर से हार और निराशा का सामना करना पड़ा. इतना कि डिप्रेशन तक झेलना पड़ा, लेकिन कहते हैं न जिंदगी उन्हीं का इम्तिहान लेती है, जिनमें जीतने का जज्बा होता है.

इन बातों का रखा ध्यान

सिर्फ 3 से 5 हज़ार की छोटी सी पूंजी से किशन ने “Wow Idli” शुरू किया. हाइजिन का ध्यान रखते हुए, सिर्फ 20 रुपये में स्वाद और भरोसे से भरी एक प्लेट इडली आज कई लोगों का पेट भर रहे हैं. शुरुआत में सिर्फ 2000 रुपये कमाई हुई थी, लेकिन मेहनत और हिम्मत ने छह महीने में उस सपने को 50 हज़ार की कमाई में बदल दिया. आज हाल यह है कि जहां भी किशन तांती अपनी इडली बेचने जाते हैं, वहां लोग उनका बेसब्री से इंतजार करते हैं. बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सब उनकी इडली के दीवाने बन चुके हैं.

पढ़ें संघर्ष

इस सफर के पीछे सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि संघर्ष और जज्बा छुपा हुआ है. एक वक्त ऐसा भी आया जब मां की दवा के लिए पैसे नहीं थे, मालिक ने उधार देने से मना कर दिया था. उसी दर्द ने उन्हें अपनी राह बनाने का हौसला दिया. गर्मी की तपती धूप हो, बारिश की फुहारें या कड़कड़ाती ठंड किशन ने अपना काम जारी रखा. आज उनकी रोज़ाना 400 इडलियां बिकती हैं. कई बार तो लोग बिना इडली खाए ही लौट जाते हैं, क्योंकि सब खत्म हो जाता है. सोशल मीडिया भी उनके सपनों का सबसे बड़ा साथी बना. रोज़-रोज़ की वीडियो अपलोड करते-करते आज उनके वीडियो पर 1 मिलियन से ज्यादा व्यूज़ आते हैं और 20 हज़ार से भी ज्यादा फॉलोअर्स बन चुके हैं.

 

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लोगों ने उड़ाया मजाक

हालांकि, जब उन्होंने ये बिजनेस शुरू किया था, तो मोहल्ले वालों ने खूब मजाक उड़ाया था. सभी ने कहा “छोटी उम्र में इडली बेचकर क्या हासिल कर लोगे?” लेकिन आज वही लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते. कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो किशन तांती से इडली बचाकर लाने को कहते हैं, ताकि वह भी इसका स्वाद ले सकें. किशन का सपना अब और बड़ा है. बहुत जल्द वो फ्रेंचाइज़ी शुरू करेंगे और भारत के हर कोने तक ‘Wow Idli’ पहुंचाएंगे.

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