कहानी जहां से शुरू हुई वहीं पर खत्म, दुष्यंत चौटाला के लिए राजनैतिक कब्रगाह बना “हिसार”

हिसार | कहा जाता है कि जो जड़ों से कट जाता है उसका वजूद मिट जाता है. फिलहाल इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला हैं. जी हां, दुष्यंत चौटाला का राजनीतिक सफर 2014 में हिसार से शुरू हुआ था. 2014 में दुष्यंत चौटाला को हिसार लोकसभा क्षेत्र की जनता ने दिल खोलकर समर्थन दिया था. इस चुनाव में दुष्यंत चौटाला हिसार के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के वारिस कुलदीप बिश्नोई को हराकर लोकसभा पहुंचे थे. धीरे-धीरे हिसार दुष्यंत चौटाला की राजनीति का केन्द्र बिन्दु बनने लगा था.

Dushyant Choutala

2018 में गोहाना रैली के दौरान हुई हूटिंग के बाद चाचा अभय चौटाला के साथ मतभेदों के चलते उन्होंने इनेलो से अलग होकर नई पार्टी बनाने का निर्णय लिया तब हिसार लोकसभा क्षेत्र ही था जो उनके साथ विश्वास के साथ खड़ा रहा और वो अलग पार्टी बनाने का निर्णय लें सकें.

अगर वोटों के गणित के हिसाब से दुष्यंत चौटाला और जेजेपी के लिए हिसार लोकसभा क्षेत्र का महत्व समझें तो 2019 के लोकसभा चुनावों में दुष्यंत चौटाला की नई नवेली जेजेपी पार्टी को हरियाणा की सभी 10 सीटों पर कुल मिलाकर तकरीबन 10 लाख वोट मिले जिसमें से अकेले हिसार का हिस्सेदारी 3 लाख से अधिक वोटों की थीं. अब आप अनुमान लगा सकते हो कि हिसार की जनता ने दुष्यंत चौटाला का पूर्ण रूप से समर्थन दिया होगा तभी यह संभव है.

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वोटों के गणित को और ज्यादा विस्तार से समझा जाये तो 2019 के विधानसभा चुनावों में जेजेपी पार्टी को 10 सीटें मिली थीं. इन 10 सीटों में से 4 सीटें हिसार लोकसभा क्षेत्र से मिली. उनकी खुद की उचाना सीट भी हिसार लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आती है. जबकि बाकी 9 लोकसभा क्षेत्रों से उनकी पार्टी महज 6 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी.

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पिछले छः महीने से कृषि कानूनों को लेकर देश में चल रहे किसान आंदोलन की वजह से दुष्यंत चौटाला पहले ही राजनीतिक तौर पर हाशिए पर आ चुके हैं. इसके पीछे की वजह भी यही है कि दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी को जिन लोकसभा क्षेत्रो में 10 सीटें हासिल हुई है वहां के किसान वोटरों ने इस पार्टी का खुलकर समर्थन किया था. लेकिन अब हरियाणा में किसान आंदोलन का केन्द्र हिसार बन चुका है.

बीती 16 मई को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हिसार दौरें के दौरान किसानों पर हुएं भयंकर लाठीचार्ज और उन पर दर्ज मुकदमों ने हिसार समेत पूरे हरियाणा को हिला कर रख दिया. हिसार में किसान लाठियां खा रहे हैं और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला चंडीगढ़ में तमाशबीन बने रहे. किसानों के लिए उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला, जिसके चलते आज हिसार क्षेत्र दुष्यंत का नाम सुनते ही आग उगल रहा है. जिस दुष्यंत चौटाला को 2014 में हिसार की जनता ने सिर आंखों पर बिठाया था, आज उसी दुष्यंत को हिसार में प्रवेश करने के लिए हजारों पुलिसकर्मियों का सहारा लेना पड़ रहा है. एक नेता के लिए इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है.

किसानो का कहना है कि दुष्यंत अब अपनी जड़ों से कट चुके हैं और इसके संभावित अंजाम का अंदाजा अब ज्यादा मुश्किल नहीं है. दुष्यंत चौटाला ने मनोहर लाल की बिना पतवार वाली नाव में बैठकर अपने सियासी कैरियर को हाशिए पर ला खड़ा किया है.

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