इस राम से भगवान ने की नाइंसाफी, पर हुनर ऐसा कि जानकर रह जाएंगे हैरान

रोहतक । जिस बच्चे के माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हों और वह खुद भी कस्सी,तसला उठाकर उनके काम में सहयोग करता रहता हों, जाहिर सी बात है वह मजबूत तो बन ही जाता है. लेकिन मजबूरी के साथ उसका चोली-दामन का साथ हों जाता है. जी हां हम जिक्र कर रहे हैं यूपी के सीतापुर में जन्मे एक मूक बधिर बच्चे का , जिसने छोटी सी उम्र में ही रेत पर उंगलियां चलाते हुए दूसरों की शक्लें उकेर कर अपने हुनर का परिचय देना शुरू कर दिया था . पर देखिए ना तो कोई तारीफ करने वाला था और न कोई मार्गदर्शन करने वाला. संयोग देखिए मेहनत मजदूरी करने वाले मां-बाप के पास भी इतना समय नहीं था कि अपने बच्चे के हुनर को परखा जाएं. पर बच्चे न ही उम्मीद छोड़ी और ना ही हिम्मत.

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मां-बाप मजदूरी करने में जुटे हुए थे और दूसरी तरफ वह खुद अपने हुनर को तराशने में जुटा रहता. एक दिन मां-बाप ने देखा कि उनका बेटा राम दूसरों के चेहरों को हु-ब-हु पेंसिल से कागज पर उतार रहा है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. काम की तलाश में यह परिवार एक महीने पहले रोहतक आया लेकिन बेटा यहां भी रंगों की दुनिया में ही खोया रहने लगा. अब मां-बाप की ख्वाहिश थी कि बेटा मजबूरी में मजदूर बनने की जगह इसी हुनर के साथ अपने भविष्य को संवारे.

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एमडीयू के गेट नंबर 2 पर मिलेगा बैठा

रोहतक में एमडीयू यूनिवर्सिटी के गेट पर नंबर दो के पास आपको एक युवा बैठा हुआ नजर आएगा. जिसका नाम तो राम प्रताप है लेकिन भगवान ने उसके साथ ऐसी नाइंसाफी की है कि वह न तो बोल पाता है और न ही सुन पाता है. पर कहते हैं ना कि भगवान एक द्वार बंद कर देता है तो दूसरा द्वार खोल देता है. भगवान ने उसे ऐसा हुनर दिया है जो हर किसी में नहीं होता. राम प्रताप दूसरों की शक्लें देखकर उसकी हु-ब-हु शक्ल कागज पर उकेर देता है. लोग उस से पोर्टरेट बनवाने आते हैं और बदलें में जो रुपए देते हैं,उसे वो हंसी-खुशी स्वीकार कर लेता है. इससे राम को आमदनी भी हो जाती है और साथ ही उसका हौसला भी बढ़ता है.

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जन्म से ही सुन और बोल नहीं सकता रामप्रताप

रामप्रताप के माता-पिता ने बताया कि वह जन्म से ही गूंगा-बहरा है. बचपन में कई जगहों पर उसका इलाज भी करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. डाक्टरों ने ऑपरेशन पर करीब दो लाख रुपए खर्च आने की बात कही और बताया कि जान बचने की कोई गारंटी नहीं है. मां-बाप ने बताया कि जब से उसने कलम पकड़ना शुरू किया है तब से ही वह तस्वीरें बनाने का काम कर रहा है. वह सुबह से शाम तक इसी काम में मगन रहता है.

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