गाँवो में तबीयत बिगड़ जाए तो भी नहीं करवा रहे कोरोना टेस्ट, लगातार बढ़ रहा मौतों का ग्राफ

सोनीपत । देश की राजधानी से सटा जिला सोनीपत, जो कोरोना पॉजिटिव केसों की संख्या में प्रदेश में चौथे स्थान पर है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में 13 मई तक 180 मौत हुई है. लेकिन दिल्ली बार्डर के साथ लगते बड़ी आबादी वाले गांवों में हालात बेहद गंभीर है. इन गांवों में कोरोना महामारी अपना कहर बरपा रही है.

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जाटी कलां
यह गांव हरियाणा के विख्यात कवि पंडित लखमीचंद की जन्मस्थली है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 20 दिनों में बुखार की वजह से 18 लोगों की मौत हुई है. गांव में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से न ही गांव में मॉनिटरिंग की गई और ना ही टेस्टिंग अभियान चलाया गया. जांच के लिए कोई टीम गांव नहीं आई तो गांव वाले भी हस्पताल जाने से डर रहे हैं. वैक्सीनेशन कैंप जरूर लगे थे लेकिन 18+ वालों के स्लॉट फुल है. गांव में हर तीसरे घर में बुखार के मरीज हैं लेकिन गांव वाले मेडिकल स्टोर व गांव के डाक्टरों से ही दवाईयां ले रहें हैं.

बड़ी गांव
इंडस्ट्रियल एरिया वाला यह गांव बिल्कुल जीटी रोड किनारे पर स्थित है. गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है और लोगों को इलाज के लिए 3 किलोमीटर दूर सीएचसी सेंटर गन्नौर जाना पड़ता है. खुद गांव के सरपंच ने बताया कि समय पर ऑक्सीजन व वेंटिलेटर नहीं मिलने से उनके दादा की जान चली गई. सरपंच ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टेस्टिंग के लिए कोई टीम गांव नहीं आई है. इस दौरान कोरोना से गांव में 10 लोगों की मौत हुई है.

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सिसाना गांव
गांव में हर तीसरे घर में बुखार है. लोग ना ही मास्क पहन रहे हैं और ना ही सोशल डिस्टेंस का पालन कर रहे हैं. युवाओं ने ग्रामीणों में जागरूकता लाने के लिए टीम बनाई है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में टेस्टिंग कैंप लगवाएं है.

खानपुर गांव
गांव के अंदर ही बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज हैं. लेकिन फिर भी गांव स्वास्थ्य विभाग की हॉट स्पॉट सूची में शामिल हैं. गांव की सरपंच ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान करीब 35 मौतें हुई हैं हालांकि मरने वालों में अधिकतर बुजुर्ग शामिल हैं. सरपंच ने कहा कि लोगों की मौत कोरोना महामारी से हुई है या बुखार से,यह नहीं कहा जा सकता.

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मलिकपुर
6 हजार की आबादी वाले इस गांव में पिछले कुछ दिनों में 12 मौतें हुई हैं. इनमें से 4 की मौत कोरोना की वजह से जबकि 8 लोगों की मौत बुखार से हुई है. सरपंच ने बताया कि गांव में ठीकरी पहरा भी लगा हुआ है लेकिन गांव की पढ़ी-लिखी जनरेशन ही कोविड प्रोटोकॉल के नियमों का पालन नहीं कर रही है. गांव में एक जगह सगाई पार्टी चल रही है जहां लोग सोशल डिस्टेंस का पालन न करते हुए इक्कठा बैठकर खाना खा रहे थे. सरपंच ने बताया कि अगर समय पर गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से टेस्टिंग हुई होती तो गांव के हालात शायद बेहतर होते.

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अस्पतालों का खौफ, स्कूलों में बन रहे हैं आइसोलेशन वार्ड

ग्रामीण क्षेत्रों के लोग हस्पताल जाने से कतरा रहे हैं. इसलिए अब गांवों के स्कूलों में ही आइसोलेशन वार्ड बनाएं गए हैं. गन्नौर के कई स्कूलों में आइसोलेशन वार्ड बनाएं जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने भी तेजी दिखाते हुए गांवों में सैंपलिंग के लिए मोबाइल टीम भेजनी शुरू की है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अगर यह प्रयास समय रहते किए होते तो गांवों में कोरोना संक्रमण फैलने से रोका जा सकता था.

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