सिंघु बॉर्डर पर किसानों के खिलाफ़ पैदल मार्च, जानिए कौन हैं शामिल?

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सोनीपत । हरियाणा के सोनीपत जिले के सिंघु बॉर्डर पर तीन कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार चल रहा है. सिंघु बॉर्डर के आस पास के इलाकों के गांवों के लोग मार्केट एसोसिएशन और पेट्रोल पम्प एसोसिएशन किसानों द्वारा एनएच बंद किए जाने से काफी परेशान हैं. इसी के चलते बुधवार को सोनीपत जिले के 30 गांव मार्केट एसोसिएशन पेट्रोल पंप एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों के खिलाफ़ पैदल मार्च निकाला. पैदल मार्च करने वाले लोगों का कहना था कि किसान जीटी रोड को एक तरफ से खाली करदें, यानी रास्ते में से हट जाएं ताकि उन्हें दिल्ली जाने में कोई परेशानी न हो.

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किसानों के खिलाफ़ पैदल मार्च करने वालों का कहना है कि करीब आठ महीने से किसान कृषि कानूनों के खिलाफ़ बॉर्डर के जीटी रोड पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए सोनीपत पुलिस ने इलाके के लिए सभी रास्तों को बंद कर दिया था. सिंघू बॉर्डर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर दी गयी थी. स्थानीय लोगों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस लोगों को रोक रही है और पैदल मार्च में शामिल होने नहीं दे रही है.

पुलिस अधिकारियों का कहना था कि वह किसी भी तरीके से लॉ एंड ऑर्डर खराब नहीं होने देंगे. जहाँ पर पैदल मार्च को रोका गया था वहाँ से महज 500 मीटर की दूरी पर किसान प्रदर्शन कर रहे थे. इस वजह से स्थानीय लोगों की मांग पुलिस ने सुनी और स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी बात सरकार तक जरूर पहुंचा दी जाएगी.

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ग्रामीणों ने दिया एक हफ्ते का समय

स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को एक हफ्ते का समय दिया है कि अगर हमारी मांगें नहीं मानी, तो गांव के रास्ते रोके जाएंगे वहीं ड्यूटी मजिस्ट्रेट बोले की टकराव की स्थिती को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों को समझा दिया गया है और उनकी मांग सरकार तक भेज दी जाएगी.

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संसद जाएंगे किसान

विभिन्न किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि वो 22 जुलाई को संसद जाएंगे. ऐसे में किसान नेता राकेश टिकैत ने बयान दिया है कि वो संसद जरूर जायेंगे. अगर पुलिस परमिशन नहीं देती है, तो कोई बात नहीं! पर हम जरूर जायेंगे. चाहे हमें गिरफ्तार ही होना पड़े. वहीं राकेश टिकैत ने कहा है कि हम गुरुवार को संसद जाएंगे, पार्लियामेंट थाने के बाहर अपना मंच लगाएंगे और जब पार्लियामेंट खत्म हो जाएगा, तो फिर वापस अपने स्थानों पर लौट जाएंगे.

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बता दें कि पिछले 1 साल से दिल्ली के तीनों बॉर्डर सिंधु बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, और टिकरी बॉर्डर पर लगातार हज़ारों किसान डटे हुए हैं. उनका कहना है जब तक इन तीन कृषि कानूनों की वापसी नहीं होगी, तब तक हमारी भी वापसी नहीं होगी. हम लगातार आंदोलन करेंगे और तीनों काले कानूनों को वापस करवाकर ही अपने गांव लौटेंगे.

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