सोनीपत | शनिवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा NEET यूजी 2024 परीक्षा के नतीजे घोषित किए गए. इसमें हरियाणा के कई विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन किया. इसी कड़ी में सोनीपत के भी कई बच्चों ने जिले का नाम रोशन करने का काम किया है. यहां के एक बैग बेचने वाले पिता के बेटे संयम वधवा ने ऑल इंडिया 1228 रैंक हासिल कर अपने परिवार और शहर का नाम रोशन किया है.
डॉक्टर दंपति की बेटी यशिका शर्मा ने ऑल इंडिया 1063 रैंक हासिल की. दोनों ही विद्यार्थियों के परिवारजन खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर शास्त्री कॉलोनी के कुश ने ऑल इंडिया 2466वां रैंक लेकर अपने परिवार का मान बढ़ाया है.
बचपन से सपना देखती थी यशिका
डॉक्टरी परिवेश में पली- बढ़ी यशिका शर्मा ने अपने माता-पिता को देखकर डॉक्टर बनने की ठान ली थी. माता- पिता ने भी उसे डॉक्टर बनने के लिए कड़ी मेहनत करने की सलाह दी थी. यशिका जब भी अपने माता- पिता के क्लीनिक में जाती थी, तो लोगों से उन्हें मिलने वाला सम्मान देखकर उसे काफी प्रेरणा मिलती थी. 10वीं की पढ़ाई सोनीपत के स्कूल से करने के बाद यशिका ने 12वीं की पढ़ाई दिल्ली से प्राप्त की.
जिला टॉपर रही थी यशिका
यशिका दसवीं में जिला टॉप विद्यार्थी रही थी, लेकिन 12वीं में वह दूसरे स्थान पर रही. यशिका का कहना है कि उनके माता- पिता डॉ. प्रीति गौतम और अरविंद गौतम हमेशा उनकी प्रेरणा स्रोत रहे हैं. इस उपलब्धि को पाने के लिए यशिका ने हर रोज करीब 12 से 14 घंटे तक नियमित रूप से पढ़ाई की. इस दौरान उसने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी. पढ़ाई के अलावा यशिका को स्केच बनाने और डांस का भी काफी शौक है.
गरीबों की सेवा करना चाहती हैं यशिका
यशिका चाहती है कि वह डॉक्टरी पेशे को अपनाकर गरीब और कमजोर लोगों का इलाज करें. यशिका की माता डॉ. प्रीति गौतम ने कहा कि यह उनके लिए बहुत खुशी का पल है कि उनकी बेटी ने NEET की परीक्षा पास की है. उनकी बेटी ने लगातार 3 साल कठिन मेहनत की है, जो आज रंग लाई है. यशिका ने 12वीं के पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को पास कर लिया. यशिका ने कहा कि सभी माता- पिता को अपने बच्चों पर विश्वास रखना चाहिए.
संयम ने दिखाया मेहनत का दम
सोनीपत के अशोकनगर के साधारण परिवार के बेटे संयम वधवा ने ऑल इंडिया 1228 रैंक हासिल कर अपने माता- पिता के सपने को पूरा किया है. दसवीं की पढ़ाई वैदिक स्कूल से करने के बाद संयम ने 12वीं की परीक्षा दिल्ली से पास की. संयम के पिता कच्चे क्वार्टर बाजार में बैग बेचते हैं. उनका पूरा परिवार जॉइंट फैमिली में रहता है. संयम ने बताया कि दसवीं के बाद ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें डॉक्टर ही बनना है. इसके लिए वह हर रोज 6 से 8 घंटे तक नियमित रूप से पढ़ाई करते थे.
पढ़ाई में नहीं किया समझौता
संयम को क्रिकेट खेलने का काफी शौक है, जिसके लिए वह सप्ताह में दो से तीन दिन बाहर खेलने जाते हैं. लेकिन उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया. परिवार ने उन पर कभी पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया. संयम की माँ स्कूल टीचर हैं और उनके पिता राकेश वधवा पुश्तैनी कारोबार कर रहे हैं. संयम का छोटा भाई आठवीं कक्षा में पढ़ रहा है.
संयम की मां ममता ने कहा कि उनके बेटे में पढ़ाई के प्रति हमेशा से लगन रही है. वह शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहा है. उसने यह साबित कर दिया है कि कठिन मेहनत और संकल्प के बलबूते पर बड़े से बड़ा मुकाम पाया जा सकता है.
