नई दिल्ली | केंद्र की मोदी सरकार (Modi Govt) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है. इन्हीं में से एक प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना है, जिसके तहत भारत सरकार देश के गरीब कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करके उनको स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है.
3 लाख रूपए का लोन
पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत, सरकार आर्थिक रूप से कमजोर कारीगरों और शिल्पकारों को 15 दिन का कौशल प्रशिक्षण देती है. प्रशिक्षण के दौरान इन्हें प्रतिदिन 500 रूपए भत्ता भी दिया जाता है. इस प्रशिक्षण की समाप्ति पर कारीगरों और शिल्पकारों को टूलकिट खरीदने के लिए एकमुश्त 15 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है.
यही नहीं पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत लाभार्थी को कुल 3 लाख रूपए का लोन दिया जाता है. इस लोन राशि को 2 चरणों में दिया जाता है. पहले चरण में 1 लाख रूपए, जबकि दूसरे चरण में व्यवसाय के विस्तार के लिए 2 लाख रूपए का लोन मिलता है. इस लोन राशि पर शिल्पकारों और कारीगरों को 5% ब्याज दर का भुगतान करना होता है.
केंद्र सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का मकसद कारीगरों और शिल्पकारों को देश के विकास की मुख्यधारा के साथ जोड़ना है. सरकार इस योजना के माध्यम से देश के करीब 30 लाख से ज्यादा पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को लाभान्वित करना चाहती है.
