करनाल | धान अनुसंधान संस्थान कौल के वैज्ञानिकों ने पीआर धान की HKR 49 नई किस्म ईजाद की है. किसान इसकी सीधी बिजाई करके पानी की भी बचत कर सकते हैं. इस किस्म की बिजाई से धान की कटाई के बाद गेहूं की बिजाई के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा और फसल अवशेष यानि पराली जलाने की नौबत नहीं आएगी.
जल्दी पककर होगी तैयार
पीआर धान की सामान्य किस्में पकने में 135 से 140 दिन का समय लेती हैं, लेकिन HKR- 49 किस्म 115 से 120 दिन में पककर तैयार हो जाएगी. किसान इसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 90 से 100 क्विंटल तक ले सकते हैं.
धान की नई किस्म
पीआर धान की HKR-49 किस्म 120 दिन में पककर तैयार होगी, जबकि सामान्य किस्म 135 से 140 दिन में तैयार होती है. कम समय में तैयार होने वाली इस किस्म से पराली में आग नहीं लगानी पड़गी. यह किस्म करनाल के अनुसंधान केंद्र कौल ने तैयार की है. इसका प्रति एकड़ उत्पादन 90 से 100 क्विंटल तक रहेगा.
लगभग 5 हजार रूपए की बचत
सीधी बिजाई से किसानों को 4 से 5 हजार रुपए की बचत होगी, दूसरा सीधी बिजाई से पानी की भी बचत होती है. खरपतवार की समस्या कम आती है. कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में ज्यादा आने से पराली जलाने के मामलों में कमी आएगी. पीआर धान की HKR- 49 किस्म लगाने से किसानों को 30 से ज्यादा दिन गेहूं बिजाई के मिल जाएंगे. ज्यादा समय मिलने के बाद किसान धान के अवशेषों का प्रबंधन कर सकेंगे और धान के अवशेष में आग नहीं लगाएंगे. इससे पर्यावरण को प्रदुषित होने से बचाया जा सकेगा. साथ ही, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहेगी.
