बागवानी से हरियाणा का यह किसान कर रहा डबल कमाई, जैविक खेती से हो रहे वारे- न्यारे; अपनाई यह तकनीक

चरखी दादरी | आमतौर पर यह माना जाता है कि खेती में कड़ी मेहनत तो होती है, लेकिन आमदनी कम होती है. हालांकि, कुछ किसान परंपरागत खेती को छोड़कर नई तकनीकों को अपनाकर शानदार मुनाफा कमा रहे हैं. ऐसा ही एक उदाहरण चरखी दादरी जिले के किसान ज्ञान सिंह का है. उन्होंने बागवानी के साथ- साथ सब्जी उत्पादन भी शुरू किया है, जिससे उन्हें दोगुनी कमाई हो रही है.

Organic Farming Kisan Kheti

ज्ञान सिंह ने जैविक खेती को अपनाकर रासायनिक खाद और कीटनाशकों से पूरी तरह दूरी बना ली है. उन्होंने अन्य किसानों से भी खेती को जहर मुक्त करने की अपील की है.

बागवानी से हो रहा मुनाफा

चरखी दादरी में आमतौर पर रबी सीजन में गेहूं और सरसों तथा खरीफ सीजन में कपास व बाजरा की फसल उगाई जाती है, लेकिन अब यहां के कई किसान परंपरागत खेती छोड़कर बागवानी को अपनाकर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं. इसी क्रम में गांव घसौला निवासी किसान ज्ञान सिंह ने अपने खेतों में नींबू, किन्नू, मौसंबी और अमरूद के बाग लगाए हुए हैं. पिछले 9- 10 सालों से वे लगातार अच्छी आमदनी कर रहे हैं.

कर रहे स्मार्ट तकनीक से खेती

ज्ञान सिंह परंपरागत किसानों से अलग तरीके से बागवानी कर रहे हैं. उन्होंने पौधों की रोपाई में एक नई तकनीक अपनाई है, जिसमें लाइन से लाइन की दूरी 20 फुट और पौधों के बीच की दूरी 10 फुट रखी जाती है. इसके अलावा, वे अपने बाग में सीजनल सब्जियां जैसे गोभी, टमाटर और मिर्च भी उगाते हैं, जिससे उनके मजदूरी और अन्य खर्च निकल जाते हैं. इस तरह फल और सब्जी उत्पादन से उन्हें अतिरिक्त मुनाफा हो जाता है. खास बात यह है कि वे टमाटर, गोभी, मिर्च और प्याज के पौधे भी खुद तैयार करते हैं, जिससे उनकी लागत और अधिक कम हो जाती है.

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जैविक खेती से कर रहे बेहतर उत्पादन

ज्ञान सिंह अपने खेतों में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते और अन्य किसानों को भी जैविक खेती अपनाने की सलाह देते हैं. वे खेत में गोबर की खाद और जीवामृत घोल तैयार करके उसका ही उपयोग पौधों में खाद के रूप में करते हैं. उनका मानना है कि इस पद्धति से उगाई गई सब्जियां और फल न केवल स्वाद में बेहतर होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं.

खुद ही करते हैं मंडियों में बिक्री

वे कहते हैं कि जैविक खेती के पहले एक- दो साल में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन बाद में इसका कोई असर नहीं पड़ता. इससे न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि लोगो को भी जहरमुक्त उत्पाद मिलते हैं. मंडी से सीधे बिक्री करने के कारण वे अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने करीब 3.5 एकड़ में बागवानी की है और ट्रायल के तौर पर आम और चीकू के पौधे भी लगाए हैं. यदि इनका उत्पादन अच्छा रहा, तो वे बाग का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं.

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Nisha Tanwar
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