नई दिल्ली | दूर- दराज क्षेत्रों में लंबे समय से तैनात अराजपत्रित रेल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. रेलवे बोर्ड ने ऑन- रिक्वेस्ट ट्रांसफर नीति में अहम बदलाव करते हुए 20 वर्ष या उससे अधिक सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरण देने का फैसला किया है. नई व्यवस्था का उद्देश्य उन कर्मचारियों को राहत देना है, जो वर्षों से अपने गृह मंडल या परिवार के पास ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं. रेलवे बोर्ड के उप निदेशक संजय कुमार ने 22 जुलाई 2026 को सभी जोनल महाप्रबंधकों को इस संबंध में दिशा- निर्देश जारी किए हैं.

नई नीति के तहत, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) पोर्टल पर हर महीने 20 वर्ष या उससे अधिक सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों की अलग प्राथमिकता सूची जारी की जाएगी. इस सूची में सबसे अधिक सेवा अवधि वाले कर्मचारी को सबसे पहले स्थानांतरण का अवसर मिलेगा.
NOC की जरूरत नहीं
ट्रांसफर मंजूर होने के बाद किसी भी प्रकार के अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की जरूरत नहीं होगी. HRMS पोर्टल के माध्यम से ट्रांसफर आदेश स्वतः जारी किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हो जाएगी. रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर संबंधित कर्मचारी को कार्यमुक्त करना अनिवार्य होगा. यदि किसी विशेष परिस्थिति में कर्मचारी को रोके जाने की आवश्यकता होती है, तब भी उसे अधिकतम एक महीने तक ही रोका जा सकेगा और इसके लिए संबंधित मंडल रेल प्रबंधक (DRM) की मंजूरी जरूरी होगी.
HRMS पोर्टल पर लागू
नई ट्रांसफर व्यवस्था अधिसूचना जारी होने के दो महीने बाद HRMS पोर्टल पर लागू कर दी जाएगी. इससे उन सैकड़ों रेलकर्मियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो 20 से 25 वर्षों तक दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने के बावजूद अपने गृह मंडल में स्थानांतरण का इंतजार करते हुए सेवानिवृत्त हो जाते थे. रेलवे बोर्ड के इस फैसले का ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (AIRF) और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे (NFIR) ने स्वागत किया है. AIRF के जोनल सेक्रेटरी ओंकार सिंह और NFIR के सहायक महामंत्री विनोद कुमार राय ने इसे कर्मचारियों के हित में ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय बताते हुए कहा कि इससे लंबे समय से लंबित ट्रांसफर मामलों का समाधान आसान होगा.