फरीदाबाद | हरियाणा के फरीदाबाद जिले के मोहब्बताबाद गांव में अरावली की पहाड़ियों के बीच एक अनोखा और रहस्यमय मंदिर स्थित है. यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि इसमें छिपे चमत्कार लोगों को हैरान कर देते हैं. यहां भारी-भरकम पत्थर की शिलाएं बिना किसी सहारे के हवा में लटकी हुई नजर आती हैं.
मंदिर के पुजारी लख्मीचंद के अनुसार, यह स्थान ऋषि उद्दालक मुनि की तपोस्थली रहा है, जहां उन्होंने 88,000 वर्षों तक तप किया था. यहां स्थापित शिवलिंग को त्रेता युग का माना जाता है, जिसकी पूजा द्वापर युग में भी होती रही है.
हवा में लटके हजारों किलो वजनी पत्थर
मंदिर की ख्याति केवल फरीदाबाद तक ही सीमित नहीं है. यहां दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. पुजारी के अनुसार, मंदिर में मौजूद शिलाएं सामान्य आकार की नहीं हैं, बल्कि हजारों किलो वजनी हैं. इन पत्थरों के हवा में लटके रहने का रहस्य विज्ञान भी आज तक नहीं सुलझा पाया है. श्रद्धालु इसे दैवीय शक्ति का प्रमाण मानते हैं, जबकि कुछ इसे ऋषियों की तपस्या का फल बताते हैं.
नचिकेता गुफा और परसोन मंदिर से जुड़ी मान्यता
मंदिर के ठीक ऊपर एक गुफा स्थित है, जिसे ‘नचिकेता’ गुफा कहा जाता है. मान्यता है कि यह गुफा परसोन मंदिर तक जाती है, जहां ऋषियों ने घोर तपस्या की थी. आज भी यह रहस्य बनी हुई है. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस स्थान पर आने से उन्हें मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है. हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग इस चमत्कारी स्थान के दर्शन करने पहुंचते हैं. वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि इतने भारी पत्थर बिना किसी आधार के हवा में कैसे स्थिर हैं.
