चंडीगढ़ | हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने पशुओं से आदमियों में फैलने वाली जानलेवा बीमारियों की रोकथाम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. सरकार ने इस दिशा में सबसे पहले किसानों की मदद लेने का फैसला लिया है. वहीं, वन हेल्थ कार्यक्रम के तहत हिसार में बहुउद्देश्यीय पशुपालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है जहां किसानों को टीकाकरण, स्वच्छता, बायोग्राफी सुरक्षा और ‘भारत पशुधन एप’ जैसी तकनीकों के माध्यम से पशुओं को रोगों से बचाने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी.
जड़ से खत्म होगी ये बीमारियां
हिसार में ही हरियाणा पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है. बता दें कि संक्रमित गाय- भैंस, बकरी के संपर्क में आने से त्वचा या सांस के जरिए एंथ्रेक्स, संक्रमित मुर्गियों और पक्षियों से बर्ड फ्लू, संक्रमित पशुओं के कच्चे दूध या मांस से ब्रुसेलोसिस, सूअरों से स्वाइन फ्लू और पागल कुत्ते- बिल्लियों या बंदरों के काटने से रेबीज जैसी बीमारियों के फैलने की संभावना बनी रहती है.
इन बीमारियों से बचाव हेतु किसानों को वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा. अगले 5 सालों में प्रदेश में गाय व भैंसों में ब्रूसैला रोग को जड़ से खत्म करने के लिए स्पेशल अभियान चलाया जाएगा.
पशुपालकों को मिल रही सेवाएं
हिसार में पशुपालकों के लिए हेल्प सेंटर खोला गया है जहां टोल फ्री नंबर 1962 पर पशुओं की बीमारियों की रोकथाम संबंधी जानकारी हासिल कर सकते हैं. गाय व भैंसों को मुंह खुर व गलघोटू रोगों से मुक्त बनाने के लिए संयुक्त वैक्सीन का प्रयोग करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है. घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए 70 मोबाइल पशु चिकित्सा वैन उपलब्ध कराई गई है. पशुपालन में जोखिम को देखते हुए सरकार ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना चलाई हुई है.
देशी गायों की नस्ल सुधार के लिए करनाल के उचानी और महेंद्रगढ़ में हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र स्थापित किए गए हैं. कैथल के क्योडक़ में ऐसा ही केंद्र स्थापित किया जा रहा है. मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि पशुपालकों की भलाई के लिए सरकार द्वारा निरंतर नए प्रयास किए जा रहे हैं.
