हरियाणा में प्राकृतिक खेती से जुड़े नियमों में बदलाव, अब हरी खाद तैयार करने पर मिलेगी सब्सिडी

चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर बागवानी और ऑर्गेनिक खेती के साथ- साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इसी कड़ी में प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती के तहत हरी खाद तैयार करने वाले किसानों को सब्सिडी देने वाले नियम में बदलाव किया है. अभी तक रासायनिक उर्वरक की जगह कई किसान हरी फसल से खाद तैयार करते आए हैं और उन्हें सरकार द्वारा बिल्कुल मुफ्त में ढैंचा का बीज उपलब्ध कराया जा रहा था लेकिन अब इस नियम में बदलाव किया गया है.

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पोर्टल पर कराएं रजिस्ट्रेशन

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अब किसान ढैंचा, उड़द और मूंग के बीज खुद खरीदकर फसल तैयार करेंगें और उसकी जोताई कर खाद बनाएंगे. इसके लिए सरकार उन्हें प्रति एकड़ 1,000 रुपए सब्सिडी के रूप में देगी. इसका लाभ उठाने के लिए किसानों को मेरी फसल- मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. जिसमें खेत में खड़ी फसल की फोटो भी संलग्न करनी होगी.

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उन्होंने बताया कि इस प्रोत्साहन योजना को इसलिए क्रियान्वित किया गया है कि किसान यूरिया और डीएपी खाद पर निर्भर न रहकर ज्यादा से ज्यादा हरी खाद का इस्तेमाल करें.

पौष्टिक तत्वों से भरपूर होगी जमीन

ढैंचा की बिजाई के बाद जब इसकी लंबाई कमर से ऊपर चली जाती है तो उसपर ट्रैक्टर चलाकर खेत में ही जोताई कर दी जाती है. इससे जमीन को नाइट्रोजन, फास्फोरस, जिंक तथा अन्य पौष्टिक तत्वों की प्राप्ति होती है. इसी तरह उड़द और मूंग के पौधे भी मिट्टी में जोताई के बाद जैविक उर्वरक क्षमता में बढ़ोत्तरी करते हैं. इनकी तो फली तोड़ने के बाद पौधे को खेत में गलाया जाता है.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.