चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के विस्तार को हरी झंडी दिखाई गई है जिसके तहत अब सेक्टर- 5 से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक करीब 1.80 किलोमीटर लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा. प्रदेश सरकार का कहना है कि इससे यातायात संबंधी चुनौतियों से निपटने और कनेक्टिविटी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

संशोधित लागत को मंजूरी
कैबिनेट मीटिंग में इस प्रोजेक्ट की संशोधित लागत को भी स्वीकृति प्रदान की गई है. 2019 में तैयार DPR के अनुसार इस परियोजना की लागत करीब 5452 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन समय के साथ इसमें काफी बढ़ोतरी हुई है और अब कुल लागत करीब 8500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. देरी, महंगाई, GST दरों में बदलाव और परियोजना के विस्तार जैसे कारणों से लागत में यह बढ़ोतरी हुई है.
सरकार ने परियोजना के लिए विश्व बैंक से कर्ज लेने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. पहले जहां विश्व बैंक और यूरोपीय संस्थानों से करीब 2688 करोड़ रुपये का ऋण लेने की योजना थी, अब लागत बढ़ने के कारण इस राशि में भी वृद्धि की जाएगी.
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट में कई तकनीकी और संरचनात्मक बदलाव भी किए गए हैं. अब सेक्टर 33 में बड़े क्षेत्रफल में मेट्रो डिपो बनाया जाएगा, जबकि पहले इसे सेक्टर 101 में सीमित क्षेत्र में प्रस्तावित किया गया था. मेट्रो को रैपिड मेट्रो से जोड़ने, अतिरिक्त कोच जोड़ने और कुछ प्रमुख स्टेशनों को विकसित करने से भी लागत बढ़ी है.
सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी होगी मजबूत
परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सेक्टर 45 मेट्रो स्टेशन को मल्टी- मॉडल इंटीग्रेशन हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां से सिटी बस सेवाएं भी संचालित होंगी. इससे यात्रियों को मेट्रो और बस के बीच आसानी से कनेक्टिविटी मिल सकेगी. इससे गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और लोगों को सड़कों की भीड़- भाड़ से दूर आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा.