नाम की आजादी, घर छीनने का डर आज भी बरकरार; लालडोरे के लिए तरसा सोनीपत का यह गांव

सोनीपत | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे सोनीपत जिले से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसे सुनकर हर कोई हैरत में पड़ रहा है. यहां दशकों से बसा जिले का एकमात्र ऐसा गांव जो आज भी लालडोरा के इंतजार में हैं. लालडोरा बनवाने के लिए कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दी गई है लेकिन अभी तक राहत के इंतजार में बैठे ग्रामीणों के सामने अब एक और नई समस्या आन खड़ी हुई है.

Village Gaon

दशकों पहले जिस जगदीश की वजह से गांव को जगदीशपुर नाम मिला था, आज उसके ही वंशज गांव की बसावट वाली जमीन पर दावा किए हुए हैं. इन दोनों समस्याओं के अलावा भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं.

घर छिनने का सता रहा डर

इस गांव के बसने की कहानी आज से लगभग 65 साल पहले शुरू हुई थी. पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए जगदीश नाम के व्यक्ति को झुंडपुर गांव में जमीनें मिलीं. उसने इन जमीनों पर इधर- उधर झोंपड़ी डालकर रहने वाले खेतिहर श्रमिकों को एक ही जगह पर बसाया था और आज वही जगह जगदीशपुर गांव कहलाता है.

प्रदेश सरकार ने बाकायदा गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे गांव का दर्जा दिया लेकिन जहां गांव बसा, वहां की जमीनों का मालिकाना हक नहीं बदला गया और न ही गांव का लालडोरा तय किया गया.

मिल्कियत बताकर बेच डाला जोहड़

लालडोरा तय करने के लिए गांव वालों ने जब कोर्ट का सहारा लेते हुए नक्शा पेश किया तो प्रतिवादियों में शामिल जगदीश के बेटे राजेंद्र ने उसी नक्शे के आधार पर जमीन पर अपनी मिल्कियत बताते हुए दावा कर दिया. इतना ही नहीं, इसी मिल्कियत के आधार पर गांव के बीचोंबीच स्थित साढ़े 3 एकड़ तालाब को भी बेच दिया.

अब गांव के लोग राजेन्द्र आदि के द्वारा दायर मुकदमे से घर छिनने की आंशका के चलते दहशत के साये में जी रहे हैं. ग्रामीणों में डर बना हुआ है कि भविष्य में ये लोग सड़कों, रास्तों और स्कूल आदि जगहों पर भी अपना दावा कर सकते हैं. 4 हजार से ज्यादा आबादी वाले इस गांव को सरकार ने 10 साल पहले अपनी पंचायत चुनने का अधिकार दिया था लेकिन आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. गांव में किसी योजना को लागू करने के लिए पंचायती जमीन भी उपलब्ध नहीं है.

गांव वालों ने लालडोरा तय करने के लिए कोर्ट की शरण ली. हमारी प्रार्थना है कि जो जहां बसा है उसे बसा रहने दिया जाए, उजाड़ा न जाए. ये लोग जहां- तहां रह रहे थे, इन्हें जगदीश ने ही वहां से उजाड़कर एक जगह पर बसाया था. हम चाहते हैं कि गांव में बसावट से तथा सरकारी सुविधाओं वाले स्थानों से जगदीश और उसके वंशजों के नाम रेवेन्यू रिकार्ड से हटाए जाएं- अजय गर्ग, एडवोकेट, ग्रामीणों के वकील

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.