सिरसा | हरियाणा के सिरसा जिले से होकर गुजरने वाली घग्गर नदी फिलहाल शांत बह रही है. इसमें पानी का स्तर काफी कम है. बरसात से पहले की स्थिति किसानों के लिए राहतभरी जरूर है लेकिन पिछले वर्षों के अनुभवों ने उनकी चिंता अभी खत्म नहीं होने दी है. दरअसल, मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ते ही घग्गर कई बार तटबंध तोड़ चुकी है जिससे हजारों एकड़ फसल बर्बाद हुई है.

मौजूदा समय में घग्गर नदी में करीब 300 से 400 क्यूसेक पानी बह रहा है और पानी तलहटी तक सीमित है. नदी किनारे के इलाकों में किसान धान की बुवाई में जुटे हुए हैं. कई गांवों में धान की रोपाई पूरी हो चुकी है जबकि कुछ क्षेत्रों में यह काम अभी जारी है.
सिरसा में घग्गर का जलस्तर कम
घग्गर से लगभग हर साल उन्हें मार झेलनी पड़ती है. हर साल भारी मात्रा में नुकसान होता है. तटबंध टूटने से खेतों में पानी भर जाता है और तैयार फसलें बर्बाद हो जाती हैं. इसके बाद, मुआवजा मिलने में भी लंबा समय लग जाता है जिससे आर्थिक संकट और बढ़ जाता है. किसान नेता इकबाल सिंह के अनुसार, मल्लेवाला, पनिहारी और आसपास के क्षेत्रों में घग्गर के तटबंध कमजोर हो गए थे. ग्रामीणों ने प्रशासन का इंतजार करने के बजाय खुद आगे आकर मिट्टी डालकर टूटे हिस्सों को मजबूत किया है जिससे बरसात के समय किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके.
नहीं मिली किसानों को राहत
उन्होंने बताया कि पिछले साल फसल खराब होने पर सरकार की ओर से मुआवजा जारी किया गया था लेकिन अभी भी कई किसानों को राहत राशि नहीं मिली है. कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात के बावजूद किसानों को केवल जांच का आश्वासन ही मिला है. किसानों की मांग है कि जिन लोगों का मुआवजा लंबित है, उन्हें जल्द भुगतान किया जाए.
किसान सतर्क
किसानों के मुताबिक नेजाडेला, पनिहारी, फरवाई, संगर, केलनिया और झोरड़नाली जैसे गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था. अकेले नेजाडेला क्षेत्र में ही करीब 250 से 300 एकड़ फसल जलभराव की चपेट में आ गई थी. कई गांवों में 300 से 400 एकड़ तक कृषि भूमि प्रभावित हुई थी. मानसून से पहले घग्गर की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है लेकिन नदी के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए किसान सतर्क हैं और तटबंधों को मजबूत करने के प्रयास जारी रखे हुए हैं.