झज्जर | हरियाणा के झज्जर जिले के 21 गांवों में किसान सालों से जलभराव की समस्या झेल रहे हैं, जिनके लिए राहत भरी खबर है. बता दें कि सेमग्रस्त जमीन को दोबारा कृषि योग्य बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक की सहायता से करीब 29 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिल गई है. इस योजना के तहत लगभग 24,900 एकड़ भूमि से खारा पानी निकालकर ड्रेनों में छोड़ा जाएगा जिससे लंबे समय से प्रभावित जमीन पर फिर से खेती संभव हो सकेगी. भूमि संरक्षण विभाग ने परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है.

अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने और फसल कटाई के बाद अगले साल अप्रैल से विभिन्न गांवों में कार्य शुरू होने की संभावना है. योजना के तहत, प्रभावित क्षेत्रों में 315 सोलर संचालित वर्टिकल ट्यूबवेल लगाए जाएंगे.
किसानों के लिए खुशखबरी
इन ट्यूबवेलों की मदद से जमीन के नीचे जमा खारा पानी बाहर निकाला जाएगा. इसके बाद, पाइपलाइन के जरिए इस पानी को नजदीकी ड्रेनों तक पहुंचाया जाएगा. सौर ऊर्जा आधारित सिस्टम होने के कारण बिजली पर निर्भरता कम होगी और संचालन खर्च भी घटेगा जिसकका लाभ जिले के हजारों किसानों को मिलेगा. लंबे समय से कई गांवों में भूजल स्तर बढ़ने और जमीन में लवणीयता अधिक होने के कारण खेती प्रभावित हो रही थी. कई किसानों को अपनी जमीन खाली छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
परेशानी से मिलेगा छूटकारा
परियोजना पूरी होने के बाद इन क्षेत्रों में गेहूं, सरसों, बाजरा समेत अन्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है. योजना के दायरे में खातीवास, धौड़, तलाव, बाकरा, डीघल, लकड़िया, धांधलान, छारा, मातन, शेरिया, गोच्छी, बिसहान, मदाना, ढराना, देशलपुर, मांगावास, चिमनी, इश्लामगढ़, फोर्टपूरा, तामसपुरा और बिरड़ गांव शामिल हैं. इन गांवों की बड़ी मात्रा में कृषि भूमि सेम की समस्या से प्रभावित रही है.
परियोजना के लागू होने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होगा. साथ ही, भूजल प्रबंधन और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. लगभग 24,900 एकड़ भूमि के दोबारा खेती योग्य बनने से जिले के कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और हजारों परिवारों की आजीविका को स्थायी आधार प्राप्त होगा- मनोज यादव, सहायक, भूमि संरक्षण विभाग