कुरुक्षेत्र | हरियाणा के कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से 25 जून 1975 को लगाए गए Emergency की याद में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं, लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों, जेलों में बंद किए गए नेताओं और आम लोगों पर हुए अत्याचारों को तस्वीरों तथा दस्तावेजों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया.

प्रदर्शनी का अवलोकन पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा ने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौर की घटनाओं को देखकर और पीड़ित लोगों की कहानियां सुनकर आज भी आंखें नम हो जाती हैं. उस समय लोगों पर अमानवीय अत्याचार किए गए और लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का काम हुआ.
50 साल बाद फिर चर्चा में Emergency
सुभाष सुधा ने कहा कि आपातकाल के दौरान जबरन नसबंदी करवाई गई, लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए और हजारों नागरिकों को बिना किसी अपराध के जेलों में बंद कर दिया गया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का गला घोंटकर लोगों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया था. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस प्रदर्शनी को जरूर देखें ताकि उस दौर की वास्तविकता को समझ सकें. उन्होंने कहा कि जो लोग उस समय जेलों में रहे और संघर्ष का सामना किया, जब वे अपने अनुभव सुनाते हैं तो उनकी आंखों से आज भी आंसू निकल आते हैं. उनकी पीड़ा यह बताने के लिए काफी है कि देश ने उस दौर में कितनी कठिन परिस्थितियों का सामना किया था.
प्रदर्शनी देखने उमड़ी भीड़
पूर्व मंत्री ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी उन लोगों का सम्मान कर रही है जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया. कुरुक्षेत्र जिले के 20 ऐसे लोगों को, जिन्होंने उस समय यातनाएं झेली थीं, पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सम्मानित किया जा रहा है. सुभाष सुधा ने कहा कि 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू किया था. उस समय विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कांग्रेस के खिलाफ आवाज उठाने वाले हजारों लोगों को जेलों में डाल दिया गया. प्रदर्शनी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी समेत कई नेताओं के संघर्ष और उनके साथ हुए व्यवहार को भी दर्शाया गया है.
उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि देश के बंटवारे के दौरान लाखों लोगों ने अपने घर और परिजन खोए लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने देश निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनके अनुसार, आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय है, जिसे नई पीढ़ी को जानना और समझना चाहिए.