चंडीगढ़ | हरियाणा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नागर ने अधिकारियों को 4000 नए राशन डिपो खोलने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि जिन राशन डिपो के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए हैं उनकी जानकारी और वैकल्पिक व्यवस्था आम जनता तक समय पर पहुंचनी चाहिए ताकि राशन उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो. राजेश नागर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की.

बैठक में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की “एक राष्ट्र- एक राशन कार्ड” योजना को प्रभावी ढंग से लागू करना विभाग की प्राथमिकता है. इसके लिए खराब पीओएस मशीनों का डाटा आधार से अपडेट करने और उनमें आई- स्कैनर व फेस- स्कैनर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए.
हरियाणा में खुलेंगे 4000 नए राशन डिपो
बैठक में मंत्री ने राशन डिपो संचालकों की समस्याओं पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक डिपो संचालकों की मार्जिन मनी उनके खातों में पहुंच जानी चाहिए. डिपो के स्टॉक की निगरानी के लिए मुख्यालय स्तर पर विशेष टीम गठित करने तथा हर महीने 4 से 5 बार रैंडम निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए. अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश में अंत्योदय अन्न योजना और बीपीएल श्रेणी के लगभग 40 लाख परिवार हैं. इनके 1.57 करोड़ लाभार्थियों को हर माह राशन उपलब्ध कराया जाता है. इनमें 2.86 लाख अंत्योदय परिवार और 37.14 लाख बीपीएल परिवार शामिल हैं.
दिए यह निर्देश
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत, अंत्योदय परिवारों को 35 किलोग्राम और बीपीएल परिवारों को प्रति सदस्य 5 किलोग्राम गेहूं नि:शुल्क दिया जाता है. इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से चीनी और सरसों का तेल भी रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है. राजेश नागर ने अधिकारियों को पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान की सार्वजनिक वितरण प्रणालियों का अध्ययन करने के निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा कि यह देखा जाए कि अन्य राज्यों में राशन के साथ उपभोक्ताओं को कौन- कौन सी अतिरिक्त सुविधाएं और वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद
बैठक में भंडारण क्षमता बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. मंत्री ने कहा कि सरकारी खरीद के बाद मंडियों में भंडारण की समस्या को देखते हुए एफसीआई की तर्ज पर केंद्रीय गारंटी आधारित वेयरहाउसिंग नीति तैयार करने पर विचार किया जाना चाहिए. इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. समीक्षा बैठक में विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. जे. गणेशन, महानिदेशक अंशज सिंह, विशेष सचिव जगदीप डांडा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.