रोहतक | इंग्लैंड के ऐतिहासिक लार्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए महिला टेस्ट मैच में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की. इस यादगार जीत में हरियाणा के रोहतक की स्टार बल्लेबाज शेफाली वर्मा की अहम भूमिका रही. अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और शानदार प्रदर्शन से शेफाली लगातार भारतीय महिला क्रिकेट की मजबूत पहचान बन चुकी हैं. शेफाली वर्मा की सफलता के पीछे उनके पिता संजय वर्मा का बड़ा योगदान रहा है.

संजय खुद क्रिकेटर रहे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच सके. उन्होंने अपना सपना बेटी के जरिए पूरा करने का फैसला किया और बचपन से ही शेफाली को क्रिकेट की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया.
बचपन से सपना
जब शेफाली करीब 9 साल की थीं, तब उन्हें प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिलाया गया. उस समय एकेडमी में कोई भी लड़की खिलाड़ी नहीं थी. कोच ने उन्हें दूसरा खेल चुनने की सलाह दी, लेकिन संजय वर्मा ने हार नहीं मानी. उन्होंने शेफाली का लड़कों जैसा हेयरकट करवाया और लड़कों के साथ ही अभ्यास कराया. इसी माहौल में शेफाली ने अपनी बल्लेबाजी को निखारा और करीब 10 साल की उम्र में लेदर बॉल से खेलना शुरू कर दिया.
निगेटिविटी का सामना
वर्ष 2013 में जब सचिन तेंदुलकर रणजी ट्रॉफी मैच खेलने रोहतक के लाहली स्टेडियम पहुंचे, तब उन्हें देखकर शेफाली का क्रिकेट के प्रति जुनून और बढ़ गया. 12 साल की उम्र में उन्हें महिला क्रिकेट एकेडमी में जगह मिली. इस दौरान परिवार को रिश्तेदारों की आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन पिता और बेटी दोनों अपने लक्ष्य पर डटे रहे.
देखें उपलब्धि
रणजी स्तर पर शानदार प्रदर्शन के दम पर शेफाली का केवल 15 साल की उम्र में भारतीय महिला टीम में चयन हुआ. वह टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ियों में शामिल हैं. 19 साल की उम्र तक उन्होंने 51 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 1231 रन बनाए. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 134.53 रहा, जबकि उनके बल्ले से 149 चौके और 48 छक्के निकले.
आईसीसी के पहले अंडर-19 महिला टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को विश्व विजेता बनाने में भी शेफाली ने अहम भूमिका निभाई थी. अब वह भारत के लिए टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों प्रारूपों में खेल चुकी हैं.