नई दिल्ली | BRICS सम्मेलन के दौरान दिल्ली के ऐतिहासिक कनाट प्लेस (सीपी) की तस्वीर पूरी तरह बदली नजर आई. अतिक्रमण, अवैध रेहड़ी- पटरी वालों, भिखारियों और बेघरों से खाली कराए गए सीपी ने पुराने दौर की याद ताजा कर दी. व्यापारियों के मुताबिक, 80 के दशक में कनाट प्लेस अपनी साफ- सफाई, भव्यता और शांत माहौल के लिए जाना जाता था, वैसा ही नजारा सम्मेलन के दौरान फिर देखने को मिला.
ब्रिक्स में शामिल होने आए विदेशी मेहमानों ने भी इस बदले माहौल का आनंद लिया. उन्होंने कनाट प्लेस में खरीदारी की और स्थानीय रेस्त्रां में भारतीय व्यंजनों का स्वाद भी चखा. रविवार को भी इलाके में इसी तरह का साफ-सुथरा माहौल देखने को मिला.
अतिक्रमण लौटने का डर
व्यापारियों और रेस्त्रां संचालकों ने ब्रिक्स के दौरान बनी व्यवस्था पर खुशी जताई, लेकिन अब उन्हें चिंता है कि सम्मेलन खत्म होने के बाद सीपी में दोबारा अवैध वेंडर्स का कब्जा न हो जाए. व्यापारियों का कहना है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के तहत कनाट प्लेस को नो हाकिंग और नो वेंडिंग जोन घोषित किया गया है. नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) ने इस मामले में सक्रियता बढ़ा दी है. संगठन ने उपराज्यपाल, दिल्ली पुलिस, एनडीएमसी के साथ स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज और स्थानीय विधायक एवं दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा से अपील की है कि सीपी की मौजूदा व्यवस्था को कायम रखा जाए.
पहले 500 से 800 वेंडर्स का था कब्जा
व्यापारियों के अनुसार ब्रिक्स से पहले कनाट प्लेस में करीब 500 से 800 अवैध रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा रहता था. इससे पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी परेशानी होती थी. एनडीटीए के प्रतिनिधि ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद अगर अवैध हाकिंग दोबारा शुरू होती है तो इससे कनाट प्लेस के व्यापार और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचेगा. संगठन स्थिति पर नजर रख रहा है. नाम न छापने की शर्त पर एक प्रतिनिधि ने कहा कि जरूरत पड़ी तो इंटरनेट मीडिया पर अभियान चलाया जाएगा.
अतिक्रमण को लेकर हाई कोर्ट में कोर्ट की अवमानना का मामला पहले से लंबित है. इसमें ब्रिक्स सम्मेलन से पहले और सम्मेलन के बाद की स्थिति की तस्वीरों को साक्ष्य के तौर पर पेश करने की तैयारी है.
